Kohramlive : बीजिंग की ठंडी हवाओं और तियानजिन की चमकती गलियों में आज एक अनोखा सन्नाटा था। सात साल से ज्यादा के लंबे इंतजार के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की धरती पर उतरे। उनकी इस यात्रा पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें गड़ी हुई हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बिगड़े रिश्तों के बीच यह यात्रा और भी अहम मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें उस घड़ी पर हैं, जब PM मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठेंगे। इस वार्ता में बात सिर्फ दोस्ती की नहीं, बल्कि भारत-चीन आर्थिक रिश्तों और पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद खिंच गई डोर को फिर से जोड़ने की कोशिश होगी। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की यह मुलाकात आने वाले दिनों की कूटनीति की दिशा तय कर सकती है।
वैश्विक मंच पर भारत की आवाज
प्रधानमंत्री मोदी जापान से चीन पहुंचे हैं। वे शिखर सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं से भी मिल सकते हैं। उनका कहना है, “विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का साथ आना जरूरी है।” यहां याद दिला दें कि 2020 की गलवान घाटी की दर्दनाक रात ने दोनों देशों के रिश्तों पर गहरा साया डाल दिया था। लेकिन पिछले साल सैनिकों की वापसी के समझौते के बाद अब उम्मीद की किरण फिर जगने लगी है। मोदी आखिरी बार 2018 में चीन गये थे, जबकि शी जिनपिंग 2019 में भारत आये थे। अब एक बार फिर दोनों नेताओं की मुलाकात, जैसे रिश्तों में नई हवा का झोंका।
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