Ranchi : अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ, झारखंड प्रदेश बुधवार को राजधानी रांची में बड़ा आंदोलन करने के मूड में है। संघ की ओर से मुख्यमंत्री आवास घेराव करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। संघ के अनुसार, राज्य के सभी जिलों से पंचायत सहायक रांची पहुंचेंगे और कल सुबह मोरहाबादी मैदान में एकत्रित होंगे। इसके बाद सभी पंचायत सहायक रैली के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार ने मीडिया से कहा कि पंचायत सहायकों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से सरकार और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही अनदेखी के कारण पंचायत सहायकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा और इसमें राज्यभर से बड़ी संख्या में पंचायत सहायक शामिल होंगे।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज
संघ ने चेतावनी दी है कि मुख्यमंत्री आवास घेराव के बाद भी यदि सरकार मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रदीप कुमार के अनुसार, इसके अगले चरण में पंचायत सहायक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय ले सकते हैं।
आठ सूत्री मांगों को लेकर मैदान में पंचायत सहायक
पंचायत सहायकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आठ सूत्री एजेंडा रखा है। इनमें प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधी वार्ता कराई जाये। वर्तमान ₹2,500 मानदेय में बढ़ोतरी की जाये। हर साल ग्राम सभा से अनुमोदन की अनिवार्यता खत्म की जाये। पंचायत सचिव के पदों में 70 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये। सेवा सुरक्षा और पदोन्नति का अवसर सुनिश्चित किया जाये मांगें शामिल हैं। संघ का कहना है कि पंचायत स्तर पर वर्षों से काम करने के बावजूद सहायकों को स्थायी सुरक्षा और बेहतर अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
अनुकंपा नियुक्ति और बीमा सुविधा की मांग
पंचायत सहायकों ने सेवा के दौरान मृत्यु होने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कठिन परिस्थितियों में उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सके। संघ ने पंचायत सहायकों की समस्याओं की नियमित समीक्षा के लिये राज्य स्तर पर मॉनिटरिंग सेल के गठन की मांग भी की है। पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्रामीण प्रशासन की अहम कड़ी हैं और सरकार की योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान जरूरी है।














