- फिनांस मिनिस्टिर के गलती से आदेश जारी होने की ट्विट पर विपक्ष ने घेरा
kohram live desk : मोदी सरकार ने छोटी जमा योजनाओं की ब्याज दर में कटौती के फैसले को 24 घंटे से भी कम टाइम में वापस ले लिया है। हैरानी की बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ब्याज में कटौती का आदेश ‘गलती से’ जारी हो गया था। इस पर विपक्ष ने उन्हें घेरा है। विपक्षी दल इसे मोदी सरकार की ‘असंवेदनशीलता’ बता रहे हैं।
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वित्त मंत्री ने भूल सुधार के रूप में दी जानकारी
वित्त मंत्री ने ट्वीटकर कहा, ‘ भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें वहीं रहेंगी, जो वित्त वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही में थीं। गलती से जारी हुआ आदेश वापस ले लिया गया है।’ वित्त मंत्री के इसी ‘गलती’ या गफलत शब्द पर विपक्ष को हमला करने का मौका मिल गया है।

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मध्य वर्ग को एक और चोट पहुंचाने की थी नीयत
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा, ‘अगली तिमाही के लिए बचत योजनाओं पर ब्याज दरों का एलान एक नियमित चलन है। सरकार के 31 मार्च के रिलीज में कुछ भी ‘गफलत’ में नहीं हुआ है। बीजेपी सरकार ने ब्याज में कटौती कर मध्य वर्ग को एक और चोट पहुंचाने का निर्णय लिया था। पकड़े जाने पर वित्त मंत्री इसे चूक बता रही हैं।’ उन्होंने कहा कि जब महंगाई 6 फीसदी के करीब है और इसके बढ़ने की ही आशंका है, सरकार 6 फीसदी से कम ब्याज की पेशकश कर मध्यम वर्ग के पेट के नीचे वार कर रही है।’
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कटौती के अनुरूप लाना होगा ब्याज दरों को
जानकारों का कहना है कि यह कटौती होनी तय थी, क्योंकि बैंकों की ब्याज और लोन दरें काफी घट गई हैं। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं ने बचत और एफडी पर ब्याज दरों में कटौती कर दी है। इसलिए बाकी ब्याज दरों को इसके अनुरूप लाना ही होगा।’






