Kohramlive : हजारीबाग से निकली ये खबर सिर्फ एक घटना नहीं, यह उस पीढ़ी की त्रासदी है जो मोबाइल की स्क्रीन में अपनी दुनिया ढूंढ़ बैठी। भीम कुमार प्रजापति, बड़कागांव का एक आम युवक, जिसने एक क्लिक में अपनी पूरी ज़िंदगी दांव पर लगा दी। NTPC की कोयला परियोजना में जमीन देने के बदले 2 करोड़ रुपये मुआवजा भीम को मिला था। कुछ ही महीनों में उसने 30 लोगों से और 1 करोड़ रुपये कर्ज लिया, फिर सबकुछ ऑनलाइन जुये और गेमिंग में झोंक दिया। लालच, लत और झूठी जीत की उम्मीद ने उसे ऐसा फंसाया कि अब न पैसा बचा, न चैन की नींद।
2022 में शुरू लत लगी…
पहले कुछ हजार जीते, तो जोश बढ़ा। फिर लाखों दांव पर लगे और फिर करोड़ों का कर्ज सिर पर चढ़ गया। अब वही भीम लोगों से छुपता फिर रहा है। वह आज डर और शर्म का नाम बन गया है। घर में सन्नाटा है, दरवाजे पर दस्तक का डर है। लोग अपने पैसे मांग रहे हैं और भीम, हर कोने में एक नया ठिकाना खोज रहा है। नौकरी पर नहीं जा पा रहा, परिवार टूट चुका है, और ज़िंदगी का पहिया जैसे थम गया है। ASP अमित कुमार ने कहा कि “ऑनलाइन गेमिंग एक नशा है, जिसने कई घर उजाड़ दिये। सरकार ने अब ऐसे गेम्स पर बैन लगाया है, मगर असली रोक तभी लगेगी जब लोग खुद जागेंगे।”










