कार्तिक पूर्णिमा पर हर दिल में जगी आस्था की लौ

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Dhanbad : भोर की लालिमा जैसे ही आसमान पर मुस्कराई, वैसे ही झारखंड की नदियों के घाटों ने अपनी गोद में श्रद्धा का समंदर समेट लिया। यह कार्तिक पूर्णिमा की पावन सुबह थी, हवा में अगरबत्ती की खुशबू, कानों में शंख की गूंज और दिलों में भक्ति का सागर। हर घाट, हर दीपक, हर लहर जैसे कह रही थी, “आज मां गंगा के चरणों में खुद को अर्पित करने का दिन है।” कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती एक साथ मनाई गईं। धनबाद के राकर, खुदिया, मैथन और पंचेत घाटों पर भोर के चार बजे से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाएं सिर पर कलश, हाथों में दीप और होंठों पर “हर हर गंगे” का जाप लिये बढ़ती चली जा रही थीं। स्थानीय श्रद्धालु चंचला ने गीली पलकों से कहा,“मां गंगा में डुबकी लगाते ही लगता है जैसे मन के सारे बोझ बह गये, बस शांति रह गई, भीतर तक।” प्रशासन ने सुरक्षा, सफाई और स्वास्थ्य की व्यवस्थाओं में कोई कमी नहीं छोड़ी, पर असली दृश्य वो था, जब श्रद्धालु घाट किनारे बैठे असहायों और साधुओं को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा अर्पित कर रहे थे। कहीं बच्चों की खिलखिलाहट, कहीं आरती की धुन पूरा वातावरण आस्था की सुगंध से महक उठा था। साहिबगंज की सुबह में भक्ति और भाईचारे का अद्भुत मेल था, जहां हर दिल कह रहा था, “सबका मालिक एक।” दुमका के बासुकीनाथ धाम में भक्तों की भीड़ मानो उमड़ती नदी बन गई थी। आरती की लौ हवा में लहरा रही थी और घंटियों की ध्वनि वातावरण में घुली थी। एक बुजुर्ग ने कहा कि “कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और दीपदान करने से आत्मा को शांति मिलती है। यही तो जीवन का असली उत्सव है।”

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