Ranchi : राजधानी रांची में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर अब सख्ती की तैयारी हो गई है। अभिभावकों को राहत देने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। रांची के DC Manjunath Bhajantri की अध्यक्षता में रांची जिले में निजी विद्यालयों के शुल्क निर्धारण के लिये जिला स्तरीय जांच एवं निर्णय समिति का गठन किया गया है। यह व्यवस्था Jharkhand Education Tribunal (Amendment) Act, 2017 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है। प्रशासन का कहना है कि अब निजी स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। अगर कोई स्कूल तय शुल्क से अधिक राशि वसूलता है, तो उसके खिलाफ जिला स्तरीय कमिटी जांच कर उचित कार्रवाई करेगी। इस समिति की अध्यक्षता DC खुद करेंगे। वहीं, समिति में जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला परिवहन पदाधिकारी, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, दो निजी विद्यालयों के प्राचार्य और दो अभिभावक सदस्य शामिल किये गये हैं। सदस्यों में Guru Nanak Senior Secondary School Ranchi और DAV Kapildev Public School Ranchi के प्राचार्य तथा Delhi Public School Ranchi और Jawahar Vidya Mandir Shyamali के अभिभावक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा रांची जिले के सभी सांसद और विधायक भी इस समिति के सदस्य होंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि अगर कोई निजी विद्यालय नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर ₹50,000 से ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। जिला प्रशासन का कहना है कि यह कदम अभिभावकों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये उठाया गया है। सभी निजी विद्यालयों से अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करने का अनुरोध किया गया है।
स्कूलों के लिये नये निर्देश
जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों के लिये कई अहम निर्देश भी जारी किये हैं।
- हर स्कूल को अपनी स्कूल स्तरीय फीस निर्धारण कमिटी और अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) बनाना अनिवार्य होगा।
- कमिटी के सदस्यों की जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी।
- स्कूल परिसर में किताब, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री की बिक्री नहीं होगी।
- किसी खास दुकान से सामान खरीदने के लिए छात्रों या अभिभावकों को मजबूर नहीं किया जा सकेगा।
- स्कूल भवन और परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिये ही किया जायेगा।
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