Ranchi : झारखंड और बिहार में आतंक का पर्याय बना कुख्यात माओवादी संजय यादव आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। झारखंड और बिहार की पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने उसे मुंबई से गिरफ्तार किया है। हैरानी की बात यह है कि 13 लाख रुपये का इनामी नक्सली मुंबई के एक खटाल में नौकरी कर रहा था और गायों का दूध दुहकर पहचान छिपाये हुये था। संजय यादव उर्फ संजय गोदराम उर्फ गोदराई यादव पर झारखंड में 10 लाख और बिहार में 3 लाख रुपये का इनाम था। उस पर झारखंड में 33, गया में 10 और औरंगाबाद में 20 नक्सली घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। वह पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र के देवगन गांव का रहने वाला है।
नितेश यादव के दस्ते का था जोनल कमांडर
संजय कभी कुख्यात माओवादी नितेश यादव के दस्ते में जोनल कमांडर था। संगठन के भीतर मतभेद होने के बाद उसने माओवादी गतिविधियों से दूरी बना ली और मुंबई में खटाल में काम करने लगा। पिछले कुछ महीनों से वह वहीं रह रहा था।
भाजपा कार्यालय उड़ाने से लेकर जवानों की हत्या तक के आरोप
2019: हरिहरगंज में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा कार्यालय को विस्फोट कर उड़ाने का आरोप।
2019: पिपरा बाजार में फायरिंग। इस घटना में झामुमो के तत्कालीन प्रखंड अध्यक्ष के पति मोहन गुप्ता और सूरज कुमार सोनी की मौत हुई थी।
2016: पलामू के काला पहाड़ में लैंडमाइंस विस्फोट में सात पुलिस जवान शहीद हुये थे।
2016: बिहार के गया-औरंगाबाद सीमावर्ती इलाके में कोबरा जवानों पर हमले में 10 जवान शहीद हुये थे।
2013: पलामू के कौड़िया में माओवादियों ने टीएसपीसी के 15 कमांडरों की हत्या की थी।
इन घटनाओं में संजय की कथित भूमिका की जांच की गयी है। पुलिस मुख्यालय ने उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। सुरक्षा एजेंसियां उसे पलामू लेकर रवाना हो गयी हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ में माओवादी संगठन और उसके नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।








