Palamu : पलामू और चतरा की वादियों में अब अफीम के जहरीले धुयें की बू घुलने लगी है। पहाड़ियों की तलहटी, जंगलों की ओट और पगडंडियों की खामोशी, सब मिलकर जैसे इस काले कारोबार को पनाह दे रही हों। पलामू पुलिस ने पिछले पखवाड़े में NDPS एक्ट के तहत चार ताबड़तोड़ ऑपरेशन किये। बीते 2 नवंबर को सदर थाना क्षेत्र से एक कार से 100 किलो डोडा बरामद किया गया। तस्कर मोहम्मद चांद और जीशान (बरेली) को अरेस्ट किया गया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पंजाब-हरियाणा में घरेलू उपयोग का अफीम बड़ा बाजार है। इन खुलासों ने पुलिस की आंखों में भी हैरानी और चिंता की झलक भर दी।
रात भर का दूध, दिन भर का जहर
अफीम का पौधा दिखने में भला भला, मगर इसके हरे गोल फल पॉपी से रात भर रिसता हुआ दूधिया रस, सूखकर बन जाता है, डोडा, जो झारखंड में 1,500 रुपये किलो, और पंजाब–हरियाणा में 7,000–8,000 रुपये किलो में बिक जाता है। बरेली और मुरादाबाद जैसे शहर इस अवैध कारोबार के नये ठिकाने बन रहे हैं। जंगलों की तरह-तरह की पगडंडियां, पहाड़ी मोड़, और सीमित पुलिस चौकसी, यही वो रास्ते हैं जिनसे गुजरकर माओवादी गिरोह, स्थानीय अपराधी और कुछ लालच में आये लोग मिलकर इस जहर को शहरों तक पहुंचा रहे हैं। जहां किसी जमाने में हल जोते जाते थे, आज वहां अफीम की क्यारियां झूमती नजर आती हैं। सूत्रों के अनुसार, डोडा अब चाय की पत्तियों में मिलाया जा रहा है।
सोचिए… सड़क किनारे कुछ लाइन होटलों में चाय में इस जहर को परोसा जाता है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि डोडा इम्यूनिटी को कमजोर करता है, लिवर और किडनी को बर्बाद करता है, लंबे समय में मानसिक संतुलन तक बिगाड़ देता है। शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है, लेकिन बाजार की भूख लगातार बढ़ रही है।






