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बूढ़ा पहाड़ से उखाड़ फेंका नक्सलियों का खूंटा, देखें गजब का यह सीन….

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Ranchi(Bhavna Thakur) : बूढ़ा पहाड़ पर आशियाना बना रखे नक्सलियों के खूंटे को उखाड़ फेंका गया। नेक और मजबूत इरादे के साथ बूढ़ा पहाड़ पर चढ़ाई कर जाबांज जवानों ने गुजरे 19 दिनों में ही माओवादियों के खूंटे को डगमगा कर उसके पूरे कूनबे को तहस नहस कर दिया। बंकर ध्वस्त कर दिये गये। कैंप उजाड़ डाले गये। ढेर सारे बम, गोला और बारूद मिले। करीब 106 शक्तिशाली तरह-तरह के ग्रेनेड, केन बम और प्रेशर कूकर बम मिले। चाईनिज ग्रेनेड तक मिले। अपने अदम्य शौर्य और साहस के बलबूते बेजोड़ कामयाबी हासिल करने वाले झारखंड पुलिस जवानों की पीठ थपथपाने आज खुद राज्य के पुलिस मुखिया डीजीपी नीरज सिन्हा बूढ़ा पहाड़ पहुंचे। ऐसा पहली दफा हुआ जब राज्य का कोई डीजीपी, एडीजी और आईजी अभियान खुद बूढ़ा पहाड़ लांघ आये। वहीं बड़ी शान से तिरंगा लहराया। डीजीपी के साथ एडीजी अभियान संजय आनंद लाटकर और आईजी अमोल वेणुकांत होमकर भी बूढ़ा पहाड़ पहुंचे थे। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद तत्कालीन डीजीपी टीपी सिन्हा ने बूढ़ा पहाड़ पर चढ़ाई कर यह जता दिया था कि पुलिस चाहे तो कुछ भी कर सकती है। तब महिला IPS मंजरी जरूहार और उनके IPS पति राकेश जरूहार की अगुवाई में जवानों ने बूढ़ा पहाड़ पर धावा बोला था, तब भी माओवादियों को जोर का झटका धीरे से लगा था। तब डीजीपी टीपी सिन्हा ने आईजी मंजरी जरूहार को बुला सिर्फ इतना कहा था कि यहां बैठ कर जो कुर्सी तोड़ते रहती हो, जाओ, खुली छूट है, माओवादियों की कमर तोड़ दो।

 

बीते कई दशकों से झारखंड पुलिस के लिये चुनौती बने बूढ़ा पहाड़ को रौंद डाला गया। कुछ अलग कर दिखा देने का जोश, जुनून और जज्बा डीजीपी नीरज सिन्हा की टीम में झलक रहा है। बीते 4 सितम्बर से ऑपरेशन ऑक्टोपस के नाम से शुरू की कई आर-पार की लड़ाई में फतह हासिल कर सुरक्षाबलों का इकबाल बुलंद है। बूढ़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेड़ने की रणनीति बनाने में अहम किरदार निभाने वाले डीजीपी नीरज सिन्हा, एडीजी संजय आनंद लाटकर और आईजी अमोल वेणुकान्त होमकर ऑपरेशन ऑक्टोपस में शामिल जवानों की हौंसला अफजाई कर गये। जाबांज जवानों को बड़ा सम्मान भी मिला। ये तीनों आला अधिकारी रविवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे थे। पहाड़ के ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराया गया।डीजीपी अपने साथ जवानों के लिए फल और ड्राई फ्रूट्स भी ले गए थे। जवानों के बीच उसे बांटा। जवानों का हौंसला बढ़ाने के बाद डीजीपी सिन्हा, एडीजी लाटकर और आईजी होमकर पहाड़ के घने जंगलों में बसे ग्रामीणों से भी मिले और उनसे घूल-मिल कर बातें की। कुछ सौगातें ग्रामीणों के बीच भी बांटी गयी। ऑपरेशन ऑक्टोपस को मिली बड़ी कामयाबी के बाद पहली बार बूढ़ा पहाड़ पर मिग हेलीकॉप्टर उतारा गया। वहां पुलिस ने कई कैंप बना लिये। नदी, नालों पर पुल बांध दिए गए हैं। लातेहार के बारेसाढ़ से जाने वाले बूढ़ा पहाड़ के रास्ते में बूढ़ा नदी पर एक पुल तैयार किया गया है। कच्चे रास्ते भी बनाए जा रहे हैं। बूढ़ा पहाड़ को घेरने के लिए 35 से 40 जगहों पर सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। इसमें करीब 40 कंपनी के जवानों को लगाया गया है। जवानों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर की तैनाती की गई है और जरूरत के सामान हेलीकॉप्टर से भी पहुंचाए जा रहे हैं।

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