Garhwa(Nityanand Dubey) : अदालतों में वर्षों से चल रहे मुकदमों के बीच अगर कोई ऐसा रास्ता मिले, जहां बात भी बने, समय भी बचे और खर्च भी कम हो, तो इससे बेहतर राहत आम आदमी के लिये क्या होगी। इसी सोच के साथ 12 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर गढ़वा में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा की अहम बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गढ़वा मनोज प्रसाद ने की। बैठक में न्यायिक पदाधिकारियों के साथ जिला वन पदाधिकारी और उत्पाद पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे अधिक से अधिक मामलों की पहचान की जाये, जिनका समाधान आपसी सहमति और सुलह-समझौते के जरिये कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का मकसद लोगों को त्वरित, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना है। इसके लिये सभी स्तरों पर प्रभावी समन्वय जरूरी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लोक अदालत में निपटाये जा सकने वाले मामलों को चिह्नित कर संबंधित पक्षकारों को समय पर नोटिस और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाये।
इन मामलों का हो सकता है निपटारा
बैठक में अलग-अलग न्यायालयों में लंबित मामलों की समीक्षा के साथ कई तरह के विवादों के त्वरित निष्पादन की रणनीति पर चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से सिविल वाद, आपराधिक मामले, वैवाहिक विवाद, बैंक ऋण संबंधी मामले, बिजली और दूरसंचार से जुड़े मामले, मोटर दुर्घटना दावा, श्रम विवाद, वन संबंधी मामले अन्य सुलह योग्य मामले शामिल हैं। बैठक में इस बात पर खास जोर दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल लंबित मामलों की संख्या घटाने का माध्यम नहीं है। इसका असली उद्देश्य आपसी सहमति, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण माहौल में विवादों का स्थायी समाधान तलाशना भी है।








