Kohramlive : सावन शुक्ल पंचमी का दिन अपने आप में खास होता है। लेकिन इस बार नाग पंचमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ा असमंजस है। वजह है पंचमी तिथि का दो तारीखों में पड़ना। साल 2026 में सावन शुक्ल पंचमी 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहेगी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है, नाग पंचमी 16 अगस्त को मनायें या 17 अगस्त को? पंचांग के अनुसार इसका जवाब साफ है। दृक पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 4.52 बजे शुरू होगी और 17 अगस्त को शाम 5 बजे समाप्त होगी। चूंकि हिंदू धर्म के अधिकांश व्रत और त्योहार सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि के आधार पर तय किये जाते हैं, इसलिये 17 अगस्त को सूर्योदय के समय पंचमी तिथि मौजूद रहेगी। 17 अगस्त को सूर्योदय सुबह 5.51 बजे होगा। लिहाजा पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 को मनाना उचित रहेगा।
पूजा के लिये 2 घंटे 37 मिनट का शुभ समय
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के लिये सुबह का समय विशेष माना गया है। 17 अगस्त को पूजा का शुभ समय: सुबह 5.51 बजे से 8.29 बजे तक। यानी भक्तों के पास पूजा-अर्चना के लिये करीब 2 घंटे 37 मिनट का शुभ समय रहेगा। मान्यता है कि नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और भगवान शिव की आराधना करने से नाग संबंधी दोषों से राहत मिलती है। इस दिन कालसर्प दोष से जुड़े धार्मिक उपाय भी किये जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त से अभिजीत तक खास मुहूर्त
नाग पंचमी के दिन कई महत्वपूर्ण मुहूर्त भी रहेंगे।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:24 से 5:08 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:51 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 12:03 से 12:47 बजे तक
धार्मिक आस्था रखने वाले लोग अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार इन मुहूर्तों में भी पूजा-पाठ और मंत्र जाप कर सकते हैं। इस बार नाग पंचमी का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास बताया जा रहा है। 17 अगस्त को रवि योग और शुभ योग का संयोग रहेगा। रवि योग 17 अगस्त को सुबह 5.51 बजे से 8.04 बजे तक रहेगा। इसके बाद यह योग 18 अगस्त को सुबह 4.58 से 5.52 बजे तक रहेगा। वहीं शुभ योग 17 अगस्त की सुबह से शुरू होकर 18 अगस्त तड़के 3.29 बजे तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग आरंभ होगा। ज्योतिषीय मान्यता में रवि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
राहुकाल में क्या करें?
17 अगस्त को राहुकाल सुबह 7.30 बजे से 9.08 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में राहु-केतु से संबंधित दोषों की शांति के लिये भगवान शिव की आराधना, मंत्र जाप और धार्मिक उपाय किये जा सकते हैं। कालसर्प दोष को भी राहु-केतु से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में नाग पंचमी पर शिव आराधना और मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जा सकता है।















