spot_img

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का देश के नाम खास संदेश…

Date:

spot_img
spot_img

New Delhi : आजादी की 80वीं सुबह की आहट के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों के सामने भारत की उस तस्वीर को रखा, जिसमें अतीत की विरासत, वर्तमान की उपलब्धियां और भविष्य के बड़े सपने एक साथ दिखाई देते हैं। 14 अगस्त की शाम राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुये कहा कि तिरंगा केवल एक झंडा नहीं, बल्कि हमारी स्वाधीनता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। राष्ट्रपति का संबोधन केवल बीते 79 वर्षों की यात्रा का स्मरण नहीं था, बल्कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प की ओर भी इशारा था। उन्होंने कहा कि आजादी का असली अर्थ यही है कि हर नागरिक को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने का अवसर मिले और वह देश को आगे ले जाने में अपनी भूमिका निभा सके।

आजादी की सुबह से 2047 के सपने तक

राष्ट्रपति ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में जुटे हर वर्ग के लोगों को नमन किया। विद्यार्थी-शिक्षक हों या वैज्ञानिक-इंजीनियर, डॉक्टर हों या स्वास्थ्यकर्मी, किसान हों या श्रमिक, उन्होंने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों की सराहना की। उन्होंने तीनों सेनाओं, सशस्त्र पुलिस बलों और पुलिसकर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा को भी विशेष रूप से याद किया। प्रवासी भारतीयों और विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की भूमिका की भी प्रशंसा की। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वाधीनता की शताब्दी यानी 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य सामने है और अंत्योदय की भावना के साथ विकास का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिये।

गांधी से आंबेडकर तक, सभी महान विभूतियों को नमन

राष्ट्रपति ने स्वाधीनता आंदोलन के अलग-अलग विचारों और धाराओं का उल्लेख करते हुये कहा कि सबका लक्ष्य एक था, भारत की आजादी। उन्होंने महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुये अनगिनत देशवासियों को याद किया और डॉ. भीमराव आंबेडकर के समाज सुधार तथा राष्ट्र-निष्ठा के आदर्शों को नमन किया। 14 अगस्त को मनाये जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुये राष्ट्रपति ने विभाजन की त्रासदी झेलने वाले लाखों लोगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक हिंसा के कारण लोगों को विस्थापन और पीड़ा झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान नहीं छोड़ी। आजाद भारत के शुरुआती दिनों की कठिनाइयों को याद करते हुये राष्ट्रपति ने कहा कि देश के सामने विभाजन के गंभीर परिणामों के साथ-साथ 550 से अधिक रियासतों को भारत के साथ जोड़ने की चुनौती भी थी। उन्होंने इस ऐतिहासिक कार्य के लिये सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन किया और कहा कि उन्होंने रियासतों को नवस्वाधीन लोकतंत्र में विलय कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लोकतंत्र तभी मजबूत, जब जनता की भागीदारी मजबूत

राष्ट्रपति ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को जनभागीदारी से जोड़ा। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों की भागीदारी पर आधारित है और देशवासी राष्ट्रीय अभियानों को जनभागीदारी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया। जनप्रतिनिधियों को जन-आकांक्षाओं की आवाज बनने, कार्यपालिका को जनहित और राष्ट्रहित की नीतियों को लागू करने तथा न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को यह सुनिश्चित करने का दायित्व बताया कि अभाव के कारण कोई व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे।

ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती और सामाजिक न्याय

इस वर्ष महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती का भी राष्ट्रपति ने उल्लेख किया। उन्होंने ज्योतिबा फुले और क्रांति-ज्योति सावित्रीबाई फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के लिए किए गये कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि वंचित वर्गों को आगे बढ़ाना राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी है। राष्ट्रपति के मुताबिक, 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, करीब 59 करोड़ लोगों को जन धन योजना के जरिये बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने और इनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारकों के शामिल होने की उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। उन्होंने 80 करोड़ लोगों के लिये मुफ्त राशन और आयुष्मान भारत के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।

गांव की दुकान से दुनिया तक पहुंचा डिजिटल भारत

राष्ट्रपति ने भारत की डिजिटल यात्रा को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश में डिजिटल ढांचा तेजी से विकसित हुआ है और अब गांवों की छोटी दुकानों से लेकर रेहड़ी-पटरी तक डिजिटल भुगतान आम हो गया है। उनके अनुसार, दुनिया के रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन में भारत की हिस्सेदारी आधे से अधिक है। तकनीक के जरिये सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम हुआ है।

इसे भी पढ़ें :

मोरहाबादी से दुमका तक गूंजेगा देशभक्ति का तराना…

Ranchi : स्वाधीनता दिवस की सुबह इस बार झारखंड...

सुरंग में फंसा झारखंड का एक लाल नहीं लौटा, CM हेमंत सोरेन के निर्देश पर रेस्क्यू तेज…

Ranchi : उत्तराखंड के चमोली की पहाड़ियों में गुरुवार...

खाकी का बढ़ा मान, 18 जांबाजों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान…

Bihar : स्वतंत्रता दिवस से पहले बिहार पुलिस के...

सरेंडर करने वाली नक्सलियों का जबरदस्त रैंप वॉक… देखें वीडियो

Kohramlive : छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय...

14–18 साल के बच्चों के लिये झारखंड सरकार लाई सुनहरा मौका… जानें

Ranchi : जो बच्चे गरीबी, पारिवारिक या सामाजिक कारणों...

Advertisement

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

मोरहाबादी से दुमका तक गूंजेगा देशभक्ति का तराना…

Ranchi : स्वाधीनता दिवस की सुबह इस बार झारखंड...

सुरंग में फंसा झारखंड का एक लाल नहीं लौटा, CM हेमंत सोरेन के निर्देश पर रेस्क्यू तेज…

Ranchi : उत्तराखंड के चमोली की पहाड़ियों में गुरुवार...

खाकी का बढ़ा मान, 18 जांबाजों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान…

Bihar : स्वतंत्रता दिवस से पहले बिहार पुलिस के...

सरेंडर करने वाली नक्सलियों का जबरदस्त रैंप वॉक… देखें वीडियो

Kohramlive : छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय...

14–18 साल के बच्चों के लिये झारखंड सरकार लाई सुनहरा मौका… जानें

Ranchi : जो बच्चे गरीबी, पारिवारिक या सामाजिक कारणों...