Delhi : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सितंबर में भारत आने वाले हैं। वह नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत की अध्यक्षता में होने जा रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया का संकट दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे माहौल में ईरानी राष्ट्रपति का दिल्ली पहुंचना महज एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से खास संदेश माना जा रहा है। ईरानी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियान आगामी BRICS सम्मेलन में शामिल होने के लिये नई दिल्ली आयेंगे। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित रिश्ते बनाये रखने और संवाद के जरिये समाधान की वकालत करता रहा है। ऐसे में BRICS का मंच भारत को विभिन्न देशों के बीच बातचीत का रास्ता तलाशने का अवसर भी दे सकता है।
ईरान की नजर भारत की कूटनीतिक भूमिका पर
ईरान ने यह संकेत भी दिया है कि वह मौजूदा संकट के बीच भारत की भूमिका को सकारात्मक नजर से देखता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जून में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिये भारत आये थे। उस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संकट को कम करने में भारत की संभावित भूमिका का उल्लेख किया था। अराघची ने साफ कहा था कि ईरान भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा।
BRICS सम्मेलन में बढ़ेगा भारत का कद
भारत की अध्यक्षता में सितंबर में होने वाला 18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्थिरता से जूझ रही है। ईरानी राष्ट्रपति की मौजूदगी से सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव कम करने के संभावित रास्तों पर चर्चा की अहमियत बढ़ सकती है। भारत के लिये भी यह मौका महत्वपूर्ण है। एक ओर उसके ईरान से ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी ओर पश्चिम एशिया के कई अन्य देशों के साथ भी भारत के मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रिश्ते हैं।















