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Nadi Tola @Latehar : रहना नहीं देस बेगाना है… 11 घर-15 परिवार-50 लोग.. न कुआं है, न चापानल

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एक ही नदी से आदमी और जानवर पीते हैं पानी

एक बस्ती ऐसी, जहां न कुआं है, न चापानल

महुआडांड़ : Nadi Tola : प्रखंड महुआडांड़ की चैनपुर पंचायत के अहीरपुरवा ग्राम की नदी टोली बस्ती के लोग शायद इस आजाद मुल्क के लोग नहीं हैं, क्योंकि 15 परिवारों के 50 लोग उस नदी के पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं, जिसमें जानवर भी पानी पीते हैं। गांव में न कुआं है, न चापानल। दरअसल राज्य का तंत्र ऐसी जगह पहुंचता ही नहीं, क्योंकि ये सबल वोट तंत्र का हिस्सा नहीं हैं। इन परिवारों की बेबसी और पीले चेहरे साफ बताते हैं कि सरकार ने अर्से से इन्हें अपने हाल पर छोड़ रखा है।

प्रखंड मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूर है Nadi Tola

यह जो Nadi Tola बस्ती है प्रखंड मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। 150 मीटर की दूरी से ही स्टेट हाइवे गुजरती है। इसी रास्ते से जिले के आला अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन आज तक प्रखंड व जिला के अधिकारियों का ध्यान उस बस्ती की ओर नहीं गया। लोगों का कहना है कि आज तक कोई भी अधिकारी इस बस्ती में नहीं आया। ग्रामीणों को आज भी गांव के समीप बह रही बोहटा नदी का पानी पीना पड़ता है।

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गंदा  पानी पीने को मजबूर हैं लोग

Nadi Tolaगांव के सुकुल लोहरा, करियो देवी, सिकंदर लोहरा, पूनम देवी, बालकू बड़ाईक, सबीर लोहरा, बेचन बड़ाईक, अंजू लोहरा, बिहारी लोहरा आदि का कहना है कि हम लोग इस बस्ती में 30-35 वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन आज तक यहां स्वच्छ पानी की व्यवस्था नहीं हुई। हम लोग सालों से इसी नदी का पानी पीते हैं। यहां तक कि बरसात के दिनों में हम लोगों को गंदा पानी पीना पड़ता है, जिससे हम बीमारियों के शिकार भी होते हैं। गाय, बैल, बकरी और हम सभी इंसान इसी नदी का पानी एक ही जगह पर पीते हैं।

Nadi Tola तक पहुंचने के लिए नहीं है कोई सड़क 

इसके अलावा गांव तक पहुंचने के लिए कोई सड़क भी नहीं है, न ही मनरेगा द्वारा कोई कार्य संचालित है। हम लोग बोहटा स्थित ईंट भट्टे में मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं। आगे उन लोगों ने बताया कि आज तक कोई भी अधिकारी हम लोगों की सुध लेने नहीं आया, जबकि हम लोग प्रखंड मुख्यालय से 7 किलोमीटर की दूरी पर हैं। पक्की सड़क हमारी बस्ती से लगभग 150 मीटर की दूरी से गुजरी है। अगर कोई बरसात के दिनों में बीमार पड़ जाए, तो मरीज को स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के लिए भी सोचना पड़ता है।

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वहीं इंदिरा आवास के नाम पर वित्तीय वर्ष 17-18, में एक और 19-20 में 1 व्यक्ति को इंदिरा आवास का लाभ मिला है। इस संबंध में एसडीओ नित निखिल सोरेन ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। शीघ्र ही बीडीओ के साथ गांव जाकर वहां की समस्याओं के बारे जानकारी ग्रामीणों से लेकर हमारे स्तर से जो संभव होगा, किया जाएगा।

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