Ranchi/UP : 18 साल छह माह जेल में रहने के बाद सलाखों की पहलू में दम तोड़ देने वाले माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के नाम का गजब का जलजला और रूतबा था। जेल के अंदर भी उसका रूआब और ठसक देखने वाले दंग रह जाते थे। एक पूर्व DGP का कहना है कि मछली खाने के शौकिन मुख्तार जेल के अंदर ही तालाब तक खुदवा डाले। उसे रोकने, टोकने और बोलने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाती थी। उसके नाम का दहशत ऐसा था कि मुख्तार को पंजाब की रोपड़ जेल से अप्रैल 2021 में यूपी की बांदा जेल शिफ्ट किया गया। खौफ का असर ये हुआ कि कोई भी जेलर इस जेल का चार्ज लेने के लिए राजी नहीं हुआ। बाद में विजय विक्रम सिंह और एके सिंह की पोस्टिंग जेल में हुई। जून 2021 में बांदा जेल में छापा मारा गया। कई जेल कर्मचारी मुख्तार की तिमारदारी में लगे मिले। तत्कालीन DM डीएम अनुराग पटेल और SP अभिनंदन की जॉइंट रिपोर्ट पर डिप्टी जेलर वीरेश्वर प्रताप सिंह और 4 बंदी रक्षक सस्पेंड कर दिए गये थे। मुख्तार का रुतबा इतना था कि वह जो सुविधा चाहता, वह उसे बैरक में ही मिल जाती थी। बिना इजाजत बेल पाने वाले कैदी बाहर तक नहीं निकलता था।
गाजीपुर के पीजी कॉलेज से स्नातक का छात्र रहा मुख्तार अंसारी की गिनती कभी क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ियों में हुआ करती थी। मनबढ़ू Mukhtar Ansari को गलत संगत ने अपराध जगत में धकेल दिया। बाहुबल से बनाई गई सियासी जमीन पर मुख्तार अंसारी लगातार पांच बार विधायक चुना गया। 20 जून 1963 को जन्मे मुख्तार अंसारी 80 के दशक में साधु-मकनू गैंग से नाता जोड़ लिया। साधु और मकनू को वह अपना गुरु मानता था। धीरे-धीरे खुद का अपना गैंग खड़ा कर माफिया सरगना बन गया। आंध्र प्रदेश से मछली मंगवा कर बेचने का बड़ा कारोबार भी स्थापित कर लिया था। Mukhtar Ansari के नाम का जलजला बिहार, झारखंड, यूपी और नेपाल तक था। साल 1997 में मुख्तार अंसारी का अंतरराज्यीय गिरोह पुलिस डोजियर में दर्ज किया गया। 25 अक्तूबर 2005 को मुख्तार जेल की सलाखों के पीछे गया तो फिर बाहर नहीं निकल पाया। जेल में भी वह शान से रहता था। उसका रुतबा था।
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