Ranchi : राज्य के 73 हजार सिपाही और हवलदारों का आज से आंदोलन शुरू हो गया। पहले चरण में 9 से 11 मार्च तक जवान काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी कर रहे हैं। राज्य के सभी जिलों के जवान अपनी वर्दी पर काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी कर रहे हैं। विधानसभा में तैनात जवान भी काला बिल्ला खड़े नजर आये। एसोसिएशन से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर मांगों पर कोई पहल नहीं की गई तो 21 मार्च को सभी जवान सामूहिक उपवास पर रहेंगे। इस दिन सभी जिला-वाहिनी, पोस्ट व पिकेट का मेस बंद रहेगा। अगर इसके बाद भी कोई पहल नहीं की गई तो 31 मार्च को एसोसिएशन के पदाधिकारी-सदस्य अपने-अपने जिला,वाहिनी मुख्यालय में एक दिवसीय धरना देंगे। फिर वहां के विभागाध्यक्ष को अपनी मांग पत्र सौंपगे। अगर इसके बाद भी इनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो सभी जवान पांच दिनों के सामूहिक अवकाश पर जाएंगे। वहीं विधानसभा में बगोदर से माले विधायक विनोद सिंह ने जवानों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने भी जवानों के समर्थन में काला बिल्ला लगाया।

ये है इनकी मांगें
- 20 दिनों का क्षतिपूर्ति अवकाश पहले की तरह बहाल करें।
- पुलिसकर्मियों को मिलने वाले एक माह के अतिरिक्त वेतन में त्रुटि का निदान हो।
- एसीपी-एमएसीपी से संबंधित आदेश में त्रुटि को सुधारा जाये।
- सातवें वेतन के अनुसार वर्दी, राशन, धुलाई, विशेष कर्तव्य, आरमोरर, चालक, दुह, राइफल, तकनीकी, शिक्षण व प्रशिक्षण भत्ता लागू हो।
- जवानों को बेहतर इलाज के लिए मेडिक्लेम की व्यवस्था हो।
- राज्यों में जवानों के आत्महत्या की बढ़ रही घटना को रोकने के लिए सार्थक पहल हो।
- उग्रवादी अभियान में लगे जवानों की सुविधा बढ़ाई जाये साथ ही मनोबल बढ़ाया जाये।
- नए वाहिनी एवं राज्य के कई जिलों में पुलिसकर्मियों का कार्यालय, पारिवारिक आवास भवन व बैरक का निर्माण किया जाये।
- वर्ष 2004 के बाद बहाल जवानों के लिए पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाये।
- शिकायत कोषांग, स्थानांतरण समिति, अनुकंपा समिति में पुलिस मेंस एसोसिएशन को सदस्यों रखा जाये।
- मुसहरी कमेटी के अनुरूप जवानों को आठ घंटे की ड्यूटी व साप्ताहिक अवकाश दिया जाये।
- केंद्र के अनुरूप झारखंड पुलिस के जवानों के भी दो बच्चे-बच्चियों की पूरी शिक्षा का खर्च दिलाया जाये।
- शहीद जवानों के आश्रितों को भू-खंड देने के लिए नीति बनाएं। उनके जीवन यापन के लिए गैस एजेंसी-पेट्रोल पंप की पात्रता की अनुशंसा की जाये।
- कानून व्यवस्था बनाने रखने के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सिपाही-हवलदारों को मिले शहीद का दर्जा।
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