Bihar : अब बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को छुट्टी के लिये आवेदन लेकर दफ्तर-दफ्तर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। न कागज लेकर बाबुओं की मेज का चक्कर, न छुट्टी की अर्जी पर लंबे इंतजार की चिंता। सरकार नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू करने जा रही है, जिसके तहत शिक्षक-शिक्षिकाएं घर बैठे छुट्टी के लिये आवेदन कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि आवेदन मिलने के 48 घंटे के भीतर उस पर फैसला करना होगा। देरी या लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने यह जानकारी पटना कॉलेजिएट स्कूल के 191वें स्थापना दिवस सह पूर्ववर्ती छात्र मिलन समारोह में दी। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की सुविधाओं को लेकर सरकार का विशेष ध्यान 31 अक्टूबर तक रहेगा। इसके बाद 1 नवंबर से सरकार का पूरा फोकस छात्रों की पढ़ाई और उनके हितों पर होगा। इसी क्रम में शिक्षकों के लिये पूरी तरह ऑनलाइन लीव सिस्टम लागू किया जा रहा है।
अब मोबाइल-कंप्यूटर से होगी छुट्टी की अर्जी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षक-शिक्षिकाएं छुट्टी के लिये ऑनलाइन आवेदन करेंगे। आवेदन की प्रक्रिया डिजिटल होगी और संबंधित अधिकारी को निर्धारित समय सीमा के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा। यानी स्कूल से छुट्टी चाहिये तो अब अर्जी लेकर किसी कार्यालय की चौखट तक पहुंचने की जरूरत नहीं, सिस्टम पर आवेदन कीजिये और तय समय में जवाब पाइये। शिक्षा मंत्री ने साफ संकेत दिया कि नई व्यवस्था में केवल ऑनलाइन आवेदन शुरू करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि समयबद्ध तरीके से उस पर फैसला भी सुनिश्चित किया जायेगा।अगर किसी स्तर पर अधिकारी की लापरवाही के कारण शिक्षक की छुट्टी का आवेदन लंबित रहता है, तो जिम्मेदार अफसर पर कार्रवाई की जायेगी। इससे शिक्षकों को समय पर छुट्टी मिलने के साथ-साथ विभागीय कामकाज में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
मॉडल स्कूलों में मुफ्त कोचिंग का भी प्लान
शिक्षा मंत्री ने राज्य में शुरू किये जा रहे मॉडल स्कूलों को लेकर भी बड़ी जानकारी दी। इन स्कूलों में छात्र-छात्राओं को मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि सरकार को इसका बड़ा परिणाम तुरंत मिलने की उम्मीद नहीं है। शिक्षा मंत्री के मुताबिक इस पहल का वास्तविक असर दो से तीन साल बाद दिखाई देगा। सरकार की नई योजना का एक सिरा शिक्षकों की सुविधा से जुड़ा है, तो दूसरा सीधे छात्रों के भविष्य से। 31 अक्टूबर तक शिक्षक सुविधाओं पर जोर और 1 नवंबर से छात्रों की पढ़ाई पर पूरा फोकस।















