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लालकिले से पहली बार गूंजेगा राष्ट्रगीत, तोड़ने वालों को जेल…

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Delhi : आजादी की 80वीं सालगिरह इस बार कुछ अलग होगी। लालकिले की प्राचीर से जब देश तिरंगे को सलाम करेगा, तो इतिहास के पन्नों से निकली एक पुरानी आवाज भी पहली बार आधिकारिक समारोह में नये अंदाज में गूंजेगी, ‘वंदे मातरम्’। 15 अगस्त 2026 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में लालकिले की प्राचीर से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जायेगा। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई है। इसी बीच संसद से पारित नया कानून ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी सुरक्षा की उस कतार में ले आया है, जिसमें अब तक मुख्य रूप से राष्ट्रगान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान से जुड़े प्रावधान थे। प्रोटोकॉल के मुताबिक जब राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाये, तो उपस्थित सभा को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा। यानी अब सरकारी समारोहों में राष्ट्रगीत की प्रस्तुति के लिये समय, क्रम और अनुशासन, तीनों का स्पष्ट खाका तैयार है।

क्या कहता है नया कानून?

Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 ने 1971 के कानून में बदलाव करते हुये ‘वंदे मातरम्’ के गायन को जानबूझकर रोकने या ऐसी सभा में व्यवधान डालने को दंडनीय बना दिया है। विधेयक राज्यसभा से 29 जुलाई और लोकसभा से 30 जुलाई को पारित हुआ था। बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह कानून बन गया। अब यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है या उसके गायन में लगी सभा में व्यवधान पैदा करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। कानून में दोबारा अपराध करने वालों के लिये भी कड़ा प्रावधान है। यदि कोई व्यक्ति दूसरी या उसके बाद की बार ऐसा अपराध करता है, तो उसे कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल की सजा हो सकती है।

राष्ट्रगान के साथ अब राष्ट्रगीत को भी कानूनी सुरक्षा

1971 के मूल कानून में राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने पर सजा का प्रावधान था। 2026 के संशोधन ने इसी सुरक्षा को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ तक विस्तार दिया है। हालांकि ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान देने की संवैधानिक सभा की ऐतिहासिक घोषणा 1950 में ही हो चुकी थी। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ऐतिहासिक घोषणा करते हुये कहा था कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान होगा और ‘वंदे मातरम्’ को भी उसके बराबर सम्मान और दर्जा दिया जायेगा।
यानी जिस गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में देशवासियों के भीतर आजादी की लौ जगाई थी, उसकी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का फैसला आजादी मिलने से ठीक पहले ही हो गया था।

अब कार्यक्रमों में पहले ‘वंदे मातरम्’, फिर राष्ट्रगान

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में राष्ट्रगीत के लिये विस्तृत प्रोटोकॉल भी जारी किया था। यदि किसी आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाये जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ होगा और उसके बाद ‘जन गण मन’। आधिकारिक समारोहों के लिये निर्धारित पूर्ण संस्करण में छह अंतरे हैं और इसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड तय की गई है। राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राज्यपालों के संबोधन जैसे औपचारिक अवसरों पर इसका इस्तेमाल निर्धारित किया गया है।

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