UP : यूपी के सहारनपुर की उस हवेली में बीते रविवार की दोपहर एक दिल दहला देने वाली चीख गूंज उठी। बिल्लू… वही बिल्लू, जिसे उसकी मां ने 17 साल पहले श्राप दिया था—”तू इस हवेली में अकेला रहेगा, तुझे पानी देने वाला भी कोई न होगा”—उसने खुद अपने ही घर के चिराग बुझा दिये। तीन मासूमों—श्रद्धा, देवांश और शिवांश—के नन्हें-नन्हें शव देखकर बुआ सीमा और गुड्डी बार-बार बेहोश हो रहीं थीं। आंसू, दर्द और गुस्से के बीच वे चीख रहीं थीं—”मां का श्राप सच हो गया… योगेश ने अपने ही खून से हाथ रंग लिये।” हवेली के पुराने खंडहरों में 17 साल पहले भी मौत ने दस्तक दी थी, जब बिल्लू की मां, बाप और बहनों ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली थी। जाते-जाते मां ने श्राप दिया था… और अब, 17 साल बाद, योगेश की पागल शक की आग में वही श्राप सच हो गया।
15 दिन पहले ही नेहा और बच्चों को घर से निकाला था
झगड़े, शक और तनाव की जकड़ में डूबा योगेश 15 दिन पहले पत्नी नेहा और तीनों बच्चों को घर से निकाल चुका था। नेहा ने हाथ जोड़कर विनती की, पर पत्थर बन चुके पति का दिल नहीं पसीजा। उसने दरवाजा बंद कर लिया, और नेहा को मजबूरन अपनी बुआ के घर शरण लेनी पड़ी। रिश्तेदारों के बहुत समझाने-बुझाने पर आठ दिन बाद घर लौटी।
खुद पुलिस को फोन कर बोला— ‘मैंने सबको मार दिया’
रविवार दोपहर, घर का दरवाजा बंद हुआ और एक के बाद एक गोलियों की आवाजें गूंज उठीं। परिजन भागे, दरवाजा खटखटाया, पर जो देखा, वह रूह कंपा देने वाला था—तीनों मासूम खून में लथपथ पड़े थे, नेहा तड़प रही थी। इसी बीच योगेश ने खुद पुलिस को फोन किया—”मैंने सबको मार दिया… खुद को भी गोली मार लूंगा, जल्दी आइये।” पुलिस जब पहुंची, तो योगेश के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। जैसे उसने कोई पाप किया ही न हो। पूछताछ में बोला कि “बच्चे हमेशा मम्मी की तरफदारी करते थे… कहते थे कि पापा, आप गलत हो, मम्मी सही हैं। इसलिये मैंने उन्हें भी खत्म कर दिया।” अपने तीसरे बेटे को लेकर योगेश के मन में शक था, उसे यह शक था कि यह उसका बच्चा नहीं। वह उसका DNA टेस्ट भी कराना चाहता था।
श्राप की छांव में अब हवेली सूनी हो गई…
जिस हवेली में कभी हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा है। मां का श्राप, शक की आग और एक कुंठित दिमाग ने सब कुछ लील लिया। हवेली के बंद दरवाजों के पीछे अब सिर्फ सन्नाटा बचा है… और एक श्राप, जो आखिरकार सच हो गया।












