Ranchi : रमजान के मुकद्दस महीने के रोजों के बाद, जब आसमान में ईद का चांद मुस्कुराया तो हर दिल में नई उमंग जाग उठी, 31 मार्च की सुबह, जब रांची की फिजाओं में “अल्लाहु अकबर” की सदा गूंजी, तो हर चेहरा ईमान की रौशनी से दमक उठा। सुबह के कोमल उजाले में सफेद कुर्तों में सजे छोटे-बड़े, मस्जिदों और ईदगाहों की ओर बढ़े। कंधे से कंधा मिलाकर अदा की गई नमाज के बाद दुआओं में सबकी सलामती मांगी गई। नमाज के बाद जब लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया, तो जैसे सारे शिकवे मिट गये और मोहब्बत की एक नई इबारत लिखी गई। ईद की असली रौनक उसके लजीज पकवानों में होती है। घर-घर में दूध और इलायची की खुशबू में भीगी सेवइयां, खट्टा-मीठा चाट और मोती पुलाव ने रिश्तों की मिठास को और बढ़ा दी। यह सिर्फ खाने का जायका नहीं, बल्कि उस प्यार की महक है जो हर घर से उठकर पूरे शहर में फैल गई। मौलाना असगर मिस्बाही ने अपने संदेश में कहा— “मजहब की खूबसूरती भाईचारे में है। नफरत के सौदागर कभी कामयाब नहीं हो सकते, क्योंकि हमारा पैगाम मोहब्बत है।” ईद के इस मौके पर कई लोग अपने परिवार से दूर हैं, लेकिन दिलों की दूरियां मोहब्बत से मिट जाती हैं। फोन की घंटियां बजीं, वीडियो कॉल पर हंसी-ठिठोली हुई और एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी गई। शहर के हर कोने में रौनक थी। रंग-बिरंगे कपड़ों में सजे बच्चे, बड़ों के हाथ चूमकर ईदी लेते दिखे। बाजारों में रौनक थी, महकती बिरयानी की खुशबू थी, और हर गली, हर चौक पर बिखरी थी मोहब्बत की चाशनी।
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