Ranchi (Pawan Thakur) : जैसी आशंका थी, ठीक वैसा ही निकला। 8 साल के मासूम शौर्य का कातिल एक करीबी ही निकला। यह करीबी संजीव कुमार पंडा शौर्य के घर में लंबे समय तक बतौर रेंटर रहा। बाद में उसका घर छोड़ पुंदाग में रहने लगा। संजीव का एक रिश्तेदार अब भी उसके घर में रेंटर है। पढ़े लिखे MBA पास संजीव की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। उसके पास कोई काम नहीं था। वह काम की तलाश में था। पहले एक पब्लिशिंग हाउस में काम कर चुका था। उस पर कर्ज हो गया था। इसके बाद संजीव ने खतरनाक इरादा बनाया। पूरी प्लानिंग के तहत उसने काम किया। पहले एक ट्रैवल एजेंसी से भाड़े में एक कार ली। वहीं शौर्य को वॉच किया करता था। उसका कब घर से बाहर निकलना है।
बीते 3 मार्च को शौर्य घर से पास की दुकान में बिस्कुट लाने गया। रास्ते में ही पहले से घात लगाए खड़ा सजीव ने शौर्य को अपनी बातों में फंसा लिया और फिर उसे अपनी कार में बैठा कर ले गया। शौर्य अगवा करने वाले संजीव को पहले से बहुत बेहतर तरीके से जानता था। इस कारण प्रतिरोध करते हुए शोर मचाना शुरू कर दिया। संजीव घबरा गया। बोरया के करीब कार के अंदर ही शौर्य का गला घोंट दिया। तब शौर्च मरा नहीं, वह बेहोश हो गया था। संजीव उसे अपने घर की तरफ ललगुटवा सोपारोन तालाब की तरफ ले गया। वहां दोबारा गला घोंट कर उसे मार डाला। फिर एक बोरे में बंद कर उसकी डेड बॉडी को फेंक दिया। उसके मुंह को बंद करने के लिए एक सेलोटेप का इस्तेमाल किया।
शौर्य की किडनैपिंग का खुलासा सीसीसटीवी को खंगालने के बाद हुआ। सीसीटीवी में शौर्य को एक शख्स द्वारा बुलाते हुए देखा गया। फिर वह शख्स उसे लेकर चला गया। शौर्य के पिता राजू गोप का कहना था कि उनका कोई दुश्मन नहीं। किसी से कोई लफड़ा-झगड़ा भी नहीं। फिरौती के लिए भी कोई फोन नहीं आया था। रांची पुलिस कप्तान किशोर कौशल ने इसे काफी गंभीरता से लिया और सदर डीएसपी प्रभात रंजन बरुआर के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम बनाई। गठित टीम टेक्निकल सेल की मदद से संजीव कुमार पंडा तक पहुंच गई। गिरफ्तार संजीव कुमार से अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने जो कुछ कहा उसे सुन हर कोई दंंग है। एक मासूम का गला दो-दो बार घोटने में उसका हाथ तक नहीं कांपा। आखिर संजीव ने ऐसा क्यों किया, सुनें रांची पुलिस कप्तान किशोर कौशल की जुबां…
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