Ranchi : JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं का विवाद आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी 24 अगस्त को सुनवाई करेगा। सामाजिक कार्यकर्ता हरिश्रन देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें 19 अप्रैल 2026 को हुई 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन की प्रक्रिया में गंभीर सवाल उठे हैं। इसलिये मौजूदा परीक्षा को रद्द कर न्यायालय की निगरानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ नई प्रारंभिक परीक्षा कराने की मांग की गई है। वहीं, झारखंड में बीते 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद मामला और गरमा गया। याचिका के मुताबिक, एक सफल अभ्यर्थी की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल हुई, जिसके बाद मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठे। रांची में इसे लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुये। याचिका में दावा किया गया है कि प्रथम पेपर के 100 प्रश्नों में से कथित तौर पर केवल 48 प्रश्नों का उत्तर देने के बावजूद एक अभ्यर्थी को सफल घोषित किया गया। इसी दावे को याचिकाकर्ता ने जांच की जरूरत का अहम आधार बताया है। याचिका में झारखंड से बाहर के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश/न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का आग्रह किया गया है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक साइंस, IT, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। वहीं, OMR की स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी है। याचिका में JPSC, संबंधित सरकारी अधिकारियों और परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों, ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं तथा परीक्षा केंद्रों को सभी भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की गई है। इनमें मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, प्रेषण रजिस्टर, केंद्र रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा और रिजल्ट जनरेशन डेटा समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
झारखंड में JPSC को लेकर पहले से गरम है माहौल
JPSC परीक्षाओं को लेकर झारखंड में विवाद नया नहीं है। 18 अगस्त को राज्य सरकार ने कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे विरोध के बीच 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं समेत 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, इस फैसले के बाद नवनियुक्त अधिकारियों की ओर से अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं के जरिये हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाले राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। अब 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।








