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TMC सांसद महुआ मोइत्रा की छिन गई लोकसभा सदस्यता.. जानें

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New Delhi : TMC यानी तृणमूल कांग्रेस की सदस्य महुआ मोइत्रा की लोकसभा की सदस्यता शुक्रवार को खत्म कर दी गई। लोकसभा ने महुआ मामले में एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद इसे पास कर दिया। रिपोर्ट में महुआ की सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की गई थी। एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष विनोद सोनकर ने लोकसभा में शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट रखी। पूरी रिपोर्ट 106 पन्ने की है। सदस्यता खत्म करने के फैसले के बाद पूरे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर गया। इसी के साथ लोकसभा की कार्यवाही 11 दिसंबर यानी सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

यहां याद दिला दें कि बीते दिनों भाजपा सदस्य निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर प्रश्न पूछने का इल्जाम लगाया था। उन्होंने इन आरोपों पर जांच समिति से जांच कराए जाने की मांग की थी। दूबे के इल्जाम पर लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को संसद की आचार समिति को भेज दिया था। दुबे का आरोप था कि महुआ मोइत्रा ने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से प्रश्न पूछे जाने के एवज में “गिफ्ट” लिए हैं। इन आरोपों को हीरानंदानी ने भी स्वीकार किया है।

एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच सदन में पेश की गई। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त फैसले लेने होंगे। उन्होंने रिपोर्ट पर चर्चा के लिए आधा घंटे का समय तय किया, जिसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने नाकाफी बताया था। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य कल्याण बनर्जी ने मांग की कि स्वयं महुआ मोइत्रा को इस संबंध में अपना पक्ष रखने दिया जाए। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी।

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि साल 2005 में इसी तरह के मामले में 10 सांसदों को निलंबित किया गया था। उस दौरान लोकसभा अध्यक्ष रहे सोमनाथ चटर्जी ने सदस्यों को अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी थी। जोशी की ओर से पेश प्रस्ताव पर विचार करने के दौरान विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया और महुआ के निष्कासन के प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आचार समिति की रिपोर्ट बहुत लंबी है। ऐसे में सदस्यों को इसको पढ़ने का और समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि इस मुद्दे पर आज कोई फैसला न लिया जाए। कांग्रेस के मनीष तिवारी ने भी चर्चा के दौरान कहा कि TMC नेता महुआ पर आरोप लगे हैं, लेकिन उनको अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। यह न्याय संगत नहीं है। कोई भी आचार समिति दंड देने की सिफारिश नहीं कर सकती है उसे सिर्फ रिपोर्ट पेश करने का अधिकार है।

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