Kohramlive : आजकल डायबिटीज तेजी से फैल रहा है और इसी वजह से इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे तो यह धीरे-धीरे शरीर के अहम अंगों आंखों, दिल, नसों और खासकर किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। डायबिटीज से जुड़ी किडनी की बीमारी को डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहा जाता है, जो शुरुआती दौर में बिना साफ लक्षणों के बढ़ती रहती है। BHU के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. उमा शंकर वर्मा के अनुसार, जब तक स्पष्ट लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिये डायबिटीज मरीजों के लिये नियमित जांच और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
किडनी खराब होने के प्रमुख संकेत
- पैरों और आंखों के आसपास सूजन: किडनी अतिरिक्त फ्लूइड बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे शरीर में पानी जमा होने लगता है।
- पेशाब में झाग या बुलबुले: यह प्रोटीन लीकेज का संकेत हो सकता है।
- बार-बार पेशाब आना, पेशाब का रंग गहरा होना या मात्रा कम होना।
- थकान और कमजोरी: छोटे काम में भी अत्यधिक थकान, पीठ के निचले हिस्से में भारीपन।
- ब्लड प्रेशर बढ़ना: किडनी और बीपी का सीधा संबंध है।
- सांस लेने में दिक्कत: फ्लूइड फेफड़ों में जमा होने पर।
- त्वचा में लगातार खुजली, मांसपेशियों में ऐंठन, भूख न लगना, मतली या उल्टी, ये सब शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने के संकेत हो सकते हैं।
जरूरी जांचें
- यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो: किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत।
- eGFR ब्लड टेस्ट: किडनी की फिल्टर करने की क्षमता बताता है। डायबिटीज मरीजों को ये दोनों टेस्ट साल में कम से कम एक बार जरूर कराने चाहिये। वहीं, ब्लड प्रेशर की नियमित निगरानी भी जरूरी है।
ये आदतें किडनी को पहुंचाती हैं नुकसान
- पेनकिलर का अत्यधिक इस्तेमाल
- ज्यादा नमक और प्रोसेस्ड फूड
- पर्याप्त पानी और नींद की कमी
- बहुत ज्यादा मांस और चीनी
- स्मोकिंग, शारीरिक गतिविधि की कमी
बचाव के लिए क्या करें
- ब्लड शुगर और बीपी कंट्रोल में रखें
- रोजाना 10–12 गिलास पानी पियें (खासकर गर्मियों में)
- संतुलित आहार लें, नमक-चीनी कम करें
- किसी भी चेतावनी संकेत को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिये है। किसी भी सलाह पर अमल करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।




