Hazaribagh(Sunil Sahu) : हजारीबाग के समाहरणालय सभागार आज कुछ अलग ही आभा में डूबा था, फाइलों की खामोश सरसराहट, कानून की धाराओं का गूढ़ संसार और प्रशासनिक संवेदनशीलता का ठोस स्पर्श, इन्हीं सबके बीच उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के प्रमंडलीय आयुक्त पवन कुमार की अध्यक्षता में भूमि, अधिकार और राजस्व से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण अधिनियमों पर एक विस्तृत, गहन और अत्यंत अहम कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में केस हिस्ट्री, महत्वपूर्ण धारायें, राजस्व एवं अभिलेख अद्यतन, वन-भूमि संबंधी विवाद, अवैध कब्जा और रूपांतरण सभी पर एक-एक कर गहन समीक्षा की गई।धारा 14, 15, 16, 18 से जुड़े मामलों पर चर्चा में सामने आया। किरायेदारी अभिलेखों का अद्यतन, धारणाधिकार की पुष्टि, राजस्व रिकॉर्ड में संशोधन और त्रुटि सुधार, पुश्तैनी अधिकारों का दस्तावेजीकरण, यह समीक्षा कई प्रखंडों के लिये दिशा बदलने जैसी रही। धारा 46 और 49 के अंतर्गत अवैध रूपांतरण, पुश्तैनी जमीन का गैरकानूनी हस्तांतरण, परंपरागत अधिकारों से छेड़छाड़ पर विशेष बल दिया गया। प्रमंडलीय आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कानून का अनुपालन सख्ती से हो, कहीं भी ढिलाई न बरती जाये। अवैध कब्जा, जमाबंदी रद्दीकरण, पुनर्वितरण से जुड़े मामलों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की गई। वन-भूमि से जुड़े, अतिक्रमण, सीमांकन, विभागीय समन्वय, भूमि विवाद की केस हिस्ट्री प्रस्तुत की गई। इन मामलों में समन्वय की कमी ही सबसे बड़ी चुनौती बताई गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुये प्रमंडलीय आयुक्त पवन कुमार ने कहा कि भूमि मामलों में देरी आम नागरिकों पर सीधा असर डालती है, अभिलेखों का नियमित अद्यतन अनिवार्य है, विभागीय समन्वय से विवादों को समयबद्ध तरीके से सुलझाया जाये, पारदर्शिता प्रशासन की पहली शर्त है। इस अहम बैठक में DC, उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता, जिला खनन पदाधिकारी, सभी SDO, भूमि सुधार उप समाहर्ता, बीडीओ, CO, प्रखंड/अंचल निरीक्षक सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।






