Bihar : बिहार की सियासत में एक समय तूफानी धड़कन की तरह धड़कने वाला लालू प्रसाद यादव का घर आज शांत, नियंत्रित और संजीदा माहौल का प्रतीक बन चुका है। चुनाव परिणामों के बाद यह बदलाव सिर्फ दीवारों तक सीमित नहीं, यह एक पूरे राजनीतिक दौर के धीरे-धीरे पर्दे के पीछे जाने जैसा है। कभी 1, अणे मार्ग और 10, सर्कुलर रोड बिहार की जनता के लिये ऐसे थे मानो खुले मंदिर, ना रोक-टोक, ना अनुमति की जरूरत। गांव से आये लोग, कार्यकर्ता, नेता, पत्रकार… हर कोई बेधड़क प्रवेश करता था। अक्सर आंगन में मवेशियों के होने की कहानियां भी आम थीं। लेकिन अब नया घर एक नये दौर की दास्तान लिख रहा है।
अनियोजित मुलाकातें बंद, बिना अनुमति प्रवेश नहीं, सुरक्षा और जांच की कड़ी व्यवस्था, डॉक्टरों की टीम की नियमित मौजूदगी, यह सब इसलिये क्योंकि लालू यादव की सेहत अब परिवार और पार्टी की प्राथमिकता है। तनाव कम हो, माहौल शांत रहे और नेता जी को आराम मिल सके, इसी के लिये घर को लगभग “नो-पॉलिटिक्स जोन” में बदला जा चुका है। कभी यह वही घर था जहां सुबह-सुबह ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते, कार्यकर्ता रातों तक रणनीति बनाते, पत्रकार हमेशा वहीं डेरा जमाये बैठे रहते और राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में तो त्योहार भी राजनीतिक उत्सवों में बदल जाते थे। यह घर सिर्फ एक निवास नहीं, बिहार की राजनीति का धड़कता दिल था।
तेजस्वी यादव नये अध्याय के प्रमुख पात्र
अब पार्टी की दैनिक राजनीति, फैसले और गतिविधियां तेजस्वी यादव के हाथों में सिमटती जा रही हैं। लालू यादव जहां पार्टी की “पहचान” और “आत्मा” बने हुये हैं, वहीं संगठन और रणनीति की कमान नई पीढ़ी संभाल रही है। लालू यादव का घर अब सियासी भीड़ से दूर होता जा रहा है और यह सिर्फ आवागमन या सुरक्षा का मामला नहीं, यह एक दौर के शांत अंत और अगली पीढ़ी के उदय की प्रतीकात्मक शुरुआत है।






