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स्किन को रखना है सुरक्षित, तो हर्बल कलर से खेलें होली

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कोहराम लाइव डेस्क : फागुन का महत्‍व होली को लेकर है। हिंदू धर्म में इस पर्व का महत्‍व हर्षेल्‍लास और मस्‍ती के लिए है। वसंत ऋतु में इस महीने की हवा की खासियत के कारण इसे फगुनाहट की संज्ञा दी जाती है। इसमें रंगों और गुलालों का जमकर इस्‍तेमाल होता है। आजकल बाजार में उपलब्‍ध तमाम किस्‍म के रंगों और अबीरों में केमिकल मिला दिए जाते हैं, जो हमारी त्‍वचा के लिए अत्‍यंत खतरनाक हैं। अंत: होली के लिए हमें नेचुरल कलर का इस्‍तेमाल करना चाहिए। होली में इस्तेमाल होने वाला गुलाल इस महीने के दौरान खिलने वाले पौधों और फूलों से बनाया जाता है, जिसे हर्बल कलर भी कहते हैं।

सेहत के लिए हानिकारक हैं सिंथेटिक कलर

बदलते समय में नए रंग-ढंग के साथ होली का त्योहार फेमस होता गया। धीरे-धीरे प्राकृतिक रंग केमिकल बेस्ड सिंथेटिक रंगों से बदल गए। ये रंग प्राकृतिक रंगों की तुलना में सस्ते जरूर हैं, लेकिन स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं। ऐसे में आप इन केमिकल युक्त रंगों की जगह पर नेचुरल रंगों से अपनी होली को स्पेशल और सेफ बना सकते हैं।

इस प्रकार बनाएं हर्बल कलर

पीला रंग : घर पर प्राकृतिक तरीके से पीला रंग बनाने के लिए 1:2 के अनुपात में हल्दी पाउडर और बेसन लें। इन दोनों को मिक्स करके सूखा गुलाल तैयार कर सकते हैं। गेंदे के फूल और गुलदाउदी के फूल दोनों को पीसकर गीला रंग भी तैयार कर सकते हैं

लाल रंग : सूखे हुए लाल चाइना रोज यानी ओढ़उल के फूल का उपयोग करके लाल रंग तैयार किया जा सकता है। चाइना रोज को  पीसकर पाउडर बना लें। इसके स्थान पर लाल चंदन का भी उपयोग कर सकते हैं। लाल गुलाल बनाने के लिए आप चावल के आटे की समान मात्रा इसमें मिला सकते हैं। अगर आपको गीला लाल रंग ज्यादा पसंद तो अनार के छिलकों को उबालकर गीला रंग भी तैयार कर सकते हैं।

हरा रंग : हरा रंग बनाने के लिए हिना या मेंहदी पाउडर का उपयोग किया जा सकता हे। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक को पानी में उबाल लें। पानी में उबलने के बाद पालक या नीम का रंग इसमें आ जाएगा और हरा रंग तैयार हो जाएगा।

मैजेंटा : मैजेंटा रंग बनाने के लिए चुकंदर का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। चुकंदर को पीस में काटकर इसे पानी में उबाल लें और रातभर ऐसे ही रहने दें। अगले दिन मैजेंटा रंग तैयार मिलेगा।

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