साहिबगंज : गंगा नदी के घाट किनारे मिला Dolphin का शव। इसकी खबर लगते ही स्थानीय लोग घाट पहुंचने लगे। साहिबगंज जिल के राजमहर के कसबा गांव के पास गंगा घाट पर सुबह-सुबह ये नजारा देखने को मिला। इससे जिले की गंगा में भी डॉल्फिन के होने का स्पष्ट प्रमाण मिल गया है।
गंगा में हैं 1150 Dolphin
माना जा रहा है डॉल्फिन की संख्या कम हो रही है तो वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार-झारखंड में गंगा व उसकी दो सहायक नदी गंडक और घाघरा के लगभग 1,000 किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 1,150 डॉल्फिन के होने के प्रमाण हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह एक स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। इसका मतलब कि गंगा और उसकी सहायक नदियों का पारिस्थितिकी तंत्र अब भी बेहतर स्थिति में है। कहा जाता है कि डॉल्फिन स्वच्छ और ताजे पानी में ही जीवित रह सकती हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब डॉल्फिन पृथ्वी से लुप्तप्राय: हो रही है।
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इनकी घटती संख्या पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय रही है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि वह इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है या इनकी संख्या घटी है क्योंकि यह पहली बार है जब इस तरह का एक व्यापक सर्वेक्षण किया गया है।
डॉल्फिन मछली नहीं, स्तनधारी जल जीव है
डॉल्फिन लोगों के लिए कौतूहल का विषय रही है। ज्यादातर लोग इसे मछली के रूप में जानते हैं, लेकिन डॉल्फिन मछली नहीं है, बल्कि एक स्तनधारी जल जीव है। एक मनमौजी जीव होने के कारण लोग इसे देखना बहुत पसंद करते हैं। डॉल्फिन का इंसानों के प्रति विशेष व्यवहार शोध का विषय रहा है। माना जाता है कि धरती पर डॉल्फिन का जन्म करीब दो करोड़ वर्ष पूर्व हुआ और डॉल्फिन ने लाखों वर्ष पूर्व जल से जमीन पर बसने की कोशिश की, लेकिन धरती का वातावरण डॉल्फिन को रास नहीं आया और फिर उसने वापस पानी में ही बसने का मन बनाया।
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600 आवाजें निकाल सकती हैं डॉल्फिन
प्रकृति ने डॉल्फिन के कंठ को अनोखा बनाया है, जिससे वह विभिन्न प्रकार की करीब 600 आवाजें निकाल सकती हैं। डॉल्फिन सीटी बजाने वाली एकमात्र जलीय जीव है। वह म्याऊं-म्याऊं भी कर सकती है तो मुंर्गे की तरह आवाज भी निकाल सकती है। भारत, दुनिया का ऐसा पहला देश है, जिसने डॉल्फिन की बुदि्धमता और आत्मचेतना को मान्यता दी है।














