पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी, जल्द होगा मामले का खुलासा
रांची : राजभवन जैसे हाई सिक्यूरिटी जोन से महज 50 मीटर दूर राजभवन के पिछले गेट और रातू रोड चौराहा के पास उग्रवादी संगठन के नाम पर साटे गये पोस्टर ने सुरक्षा एजेंसियों की नीद उड़ा दी है और तमाम सरकारी अमला सुरक्षा को लेकर सतर्क है। सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच में जुटी हैं। पुलिस को चुनौती देने की यह अदा अगर वास्तविक है, तो मामला बेहद संगीन है, लेकिन अगर यह किसी की शरारत है, तो इसका खुलासा भी होना चाहिए, क्योंकि तभी राज्य की जनता आश्वस्त हो सकती है। यह सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेवारी है कि वे तथ्य का पता लगायें और आम जनता को आश्वस्त करें।
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हाल के दिनों में उग्रवादी गतिविधियों के नाम पर डराने का खेल भी देखा गया है। हाल ही में डॉक्टर शंभु प्रसाद से पीएलएफआई के नाम पर लेवी मांगी गयी थी। पुलिस जांच में जब मामले का खुलासा हुआ, तो रंगदारी मांगने वाले चिंदी चोर निकले। हालांकि पीएलएफआई की तरफ से पहले ही स्पष्ट किया गया था कि लेवी मांगने की घटना में संगठन का हाथ नहीं है। बाद में पुलिस कार्रवाई में साफ हो गया कि उग्रवादी संगठन के नाम पर कुछ लोग डरा-धमका कर वसूली का खेल खेल रहे हैं। हो सकता है कि राजभवन के पास पोस्टर साटे जाने की घटना भी दहशत फैलाने के लिये अंजाम दी गयी हो। हालांकि इसके बारे में कुछ साफ नहीं कहा जा सकता।
यहां याद दिला दें कि पोस्टर साटने वाले टीएसपीसी उग्रवादी संगठन का राजधानी में दूर-दूर तक कोई वजूद नहीं है। चतरा और खूंटी के इलाकों में यह प्रतिबंधित संगठन थोड़ा-बहुत सक्रिय है। हो सकता है कि पीएलएफआई की सक्रियता को देखकर टीएसपीसी की भी हिम्मत बढ़ गयी हो और राजधानी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए उसने पोस्टरबाजी की चाल चली हो। यह किसी की शरारत भी हो सकती है। पुलिस दोनों एंगल से जांच में जुटी है। उम्मीद है कि जल्द ही मामले का खुलासा हो जायेगा।
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