Ranchi : झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने के ऐलान के बाद से करीब 2 हजार सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ये लोग इसी परीक्षा के जरिये चयनित होकर सरकारी नौकरी में योगदान दे चुके हैं। सोमवार को प्रोजेक्ट भवन के बाहर JSSC CGL से चयनित अभ्यर्थियों और कर्मचारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान अपनी स्थिति की ओर खींचने की कोशिश की। उनका कहना है कि आंदोलन के बीच उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिये। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी भी तरह की जांच के लिये तैयार हैं। उनका तर्क है कि यदि किसी अभ्यर्थी पर व्यक्तिगत तौर पर गड़बड़ी या अनियमितता का आरोप है, तो उसकी जांच होनी चाहिये और दोषी पाये जाने पर कार्रवाई भी की जाये। लेकिन कुछ लोगों के खिलाफ आरोप होने की स्थिति में पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं होगा। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब सात महीने से झारखंड सरकार में सेवा दे रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्होंने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC CGL के जरिए मिली नौकरी को चुना और झारखंड सरकार में योगदान दिया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि JSSC CGL की परीक्षा और नियुक्ति की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं रही। कई अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्हें नियुक्ति हासिल करने के लिए लंबा संघर्ष और कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। कुछ कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में मामले की लड़ाई लड़ी और उसके बाद उन्हें नौकरी मिली। अब परीक्षा रद्द होने ऐलान के बाद से कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं।
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— KohramLive (@KohramLive) August 17, 2026








