हाईवे की रफ्तार और एक्सप्रेसवे की उड़ान का दिलचस्प फर्क… जानें

Date:

spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो

Kohramlive : भारत की सड़कों पर चलती गाड़ियों की अपनी-अपनी कहानी है। कहीं ट्रकों की धीमी थाप, कहीं कारों की तेज रफ्तार, और कहीं एक्सप्रेसवे पर हवा से बातें करती गाड़ियां। “रोड” का नाम लेते ही दो शब्द कानों में गूंजते हैं, हाईवे और एक्सप्रेसवे। लेकिन अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि फर्क उतना ही गहरा है, जितना कच्ची गली और चमचमाती चौड़ी सड़क में होता है।

क्या होता है नेशनल हाईवे? 

राष्ट्रीय राजमार्ग देश के बड़े शहरों, राज्यों की राजधानियों और अहम जगहों को जोड़ते हैं। इनका निर्माण और देखरेख केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय के तहत होती है। संचालन का बड़ा जिम्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) निभाता है। भारत में 200+ नेशनल हाईवे, कुल लंबाई 1.3 लाख किमी से ज्यादा है। इस रोड पर चलने की स्पीड लिमिट है। कार 100 किमी/घंटा एवं दोपहिया 80 किमी/घंटा है। देश का सबसे लंबा हाईवे NH-44 है। श्रीनगर से कन्याकुमारी, लगभग 3745 किमी।

एक्सप्रेसवे: रफ्तार का रॉयल रास्ता

एक्सप्रेसवे हाईवे से ज्यादा मॉडर्न और चौड़े होते हैं। आमतौर पर 6 से 8 लेन और पूरी तरह कंट्रोल्ड एक्सेस रोड है। यानी तय एंट्री-एग्जिट से ही गाड़ियां अंदर-बाहर जा सकती हैं। बीच में गांव का मोड़, चौराहा या अचानक कट नहीं, इससे सफर ज्यादा स्मूथ और सुरक्षित है। एक्सप्रेसवे पर मॉडर्न सुविधायें हैं। सर्विस लेन, फ्लाईओवर और अंडरपास एवं ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम। एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट कार 120 किमी/घंटा तक एवं दोपहिया ज्यादातर एक्सप्रेसवे पर एंट्री बैन हैं। सबसे चर्चित एक्सप्रेसवे आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे (करीब 302 किमी) है।

सबसे बड़ा फर्क: एंट्री का खेल

नेशनल हाईवे पर जगह-जगह कट, चौराहे और लोकल रास्ते जुड़े होते हैं। एक्सप्रेसवे पर सीमित एंट्री-एग्जिट, बीच में कोई सीधा क्रॉस रोड नहीं रहती। यानी हाईवे पर जिंदगी का ट्रैफिक मिक्स है और एक्सप्रेसवे पर सिर्फ रफ्तार का फोकस है। एक्सप्रेसवे ज्यादा चौड़े, कंट्रोल्ड और हाई-स्पीड सफर के लिये डिजाइन होते हैं, इसलिये अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित है। हाईवे पर ट्रक, बाइक, ट्रैक्टर और लोकल ट्रैफिक साथ चलते हैं, इसलिए सतर्कता ज्यादा जरूरी है। लंबी दूरी जल्दी और आराम से तय करनी हो तो एक्सप्रेसवे बेहतर है। हर शहर, गांव और कस्बे को जोड़ने वाली असली लाइफलाइन नेशनल हाईवे है।

इसे भी पढ़ें : साल के पहले सूर्य ग्रहण की 5 बड़ी बातें… जानें

spot_img
spot_img
spot_img

Related articles: