PrayagRaj (UP) : भोरे-भोर 4 बजे घर के अंदर से उठ रहे धुंआ पर कुछ लोगों की नजर पड़ी। तब किसी पड़ोसी ने घर के बेटे सुनील को फोन कर बताया। घर से 36 किलोमीटर दूर रहने वाला सुनील भागा-भागा अपने मामा के साथ घर पहुंचा। पीछे के दरवाजे से घर के अंदर घुसते ही वहां का नाजारा देख वह बेहोश हो गया। सीन ही कुछ ऐसा था कि किसी का भी कलेजा दरक जाता। घर के बाहर आंगन में तीन खटिया पर खून से लथपथ पांच लाशें पड़ी थी। सिर्फ पांच साल की मीनाक्षी खटिया के नीचे डरी सहमी दुबकी पड़ी थी। वह छिप गई थी, इस कारण बच गई।
करीब 56 साल के राजकुमार यादव, 50 साल की पत्नी कुसुम, 30 साल की गर्भवती बहू सविता, 30 साल की बेटी मनीषा और दो साल की पोती साक्षी का खात्मा हो चुका था। मारी गई गर्भवती बहू और जवान बेटी के बदन में नीचे कपड़े नहीं थे, इसे देख आशंका जताई जा रही कि मारने से पहले इनके साथ गलत काम भी किया गया।
5 साल की मीनाक्षी का बच जाना, ईश्वर की कृपा मानी जा रही है, पर डर से उसकी हालत बहुत खराब है। वह बहुत घबराई है, मानो उसे काठ मार गया हो। ना रोती है, नाम बोलती है, वह बिल्कुल गुमशुम है। कुछ देर तक तो वह हिली डुली भी नहीं। बहुत झकझोरने पर उसने सिर्फ इतना कहा कि बहुत सारे लोग आये थे, दादा-दादी को किसी चीज से मार रहे थे। बेटा सुनील की प्रयागराज स्टेशन के पास पान की दुकान है, वह वहीं किराये के मकान में अकेले रहते हैं। हफ्ता में एक दो बार घर आते जाते थे। इस कारण उनकी जान बच गई। पूरी वारदात दिल दहला देने वाली। एक मासूम बच्ची को छोड़ पूरे परिवार का खून कर दिये जाने की खबर पर पुलिस के भी हाथ पांव फूल गये।
योगी सरकार ने हत्यारों को अविलंब खोज निकालने का जिम्मा STF को दिया है। वहीं मौके पर पहुंची FSL की टीम ने घटनास्थल से कई प्रदर्श और साक्ष्य जुटाये हैं। खोजी कुत्ते को भी बुलाया गया था। दिल दरका देने वाली यह वारदात यूपी के खेवराजपुर गांव की है। पूरा गांव रो पड़ा। जिस घर में वारदात हुई, उसके अगल बगल सवा तीन सौ मीटर तक कोई दूसरा घर नहीं। घर के बाहर चारों तरफ करीब 5-6 फीट की बाउंड्री है। इस सामूहिक हत्याकांड को किसने और क्यों अंजाम दिया, यह राज अब भी दफन है।
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