Kohramlive : देश के आसमान में इन दिनों बादल नहीं, बल्कि बेचैनी का धुआं तैर रहा है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों ऐसे संकट में फंसी है, जिसकी गूंज दिल्ली से मुंबई तक सुनाई दे रही है। रविवार को ही दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट पर 220 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। पिछले तीन दिनों की तस्वीर और भी चिंताजनक है, बीते शुक्रवार को निर्धारित 2,300 फ्लाइट्स में से 1,600 रद्द, शनिवार को करीब 800 उड़ानें रद्द और रविवार को हालात एक बार फिर उथल-पुथल भरे रहे। यात्रियों की सीटें खाली है, पर शिकायतों की कतारें भरी पड़ी है। किसी की यात्रा बीच रास्ते अटक गई, तो किसी का जरूरी काम अधूरा रह गया और हर चेहरे पर एक ही सवाल, “आखिर कब लौटेगी उड़ानों की रफ्तार?” इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने हालात की गंभीरता को देखते हुये एक क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बनाया है। यह टीम लगातार बैठकों में, लगातार चर्चाओं में समाधान की तलाश में लगी है। एयरलाइन का दावा है कि स्थिति को जल्द सामान्य करने की कोशिश जारी है, पर यात्री अभी भी उसी अनिश्चितता के घेरे में खड़े हैं।
CEO पीटर एल्बर्स पर गिर सकती है गाज
उधर, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने भी इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। एयरलाइन के ऑपरेशनल फेल्योर की जांच शुरू हो गई है। वहीं, इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को नोटिस जारी किया गया है। DGCA ने CEO से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा है और साफ कहा है कि “एयरलाइन के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी आपकी है, फिर यह प्रबंधन की चूक क्यों हुई?” जबाब संतोषजनक न हुआ तो कार्रवाई तय है। आसमान के इस व्यवधान ने विमानन क्षेत्र को हिला कर रख दिया है।








