Kohramlive : ट्रेन में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिये एक अहम जानकारी सामने आई है। अक्सर रिजर्व कोच में मिडिल बर्थ(Middle berth) को लेकर यात्रियों के बीच बहस हो जाती है, कब सीट खोली जाये और कब बंद रखी जाये। अब भारतीय रेलवे ने इस संबंध में साफ नियम तय किये हैं, जिन्हें जानना हर यात्री के लिये जरूरी है। दरअसल Indian Railways ने टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुये कई दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
रेलवे ने रिजर्व टिकट बुकिंग के लिये एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) को भी कम कर दिया है।पहले यात्री 120 दिन पहले टिकट बुक कर सकते थे, लेकिन अब यह अवधि घटाकर 60 दिन कर दी गई है। रेलवे के नियम के मुताबिक दिन के समय मिडिल बर्थ(Middle berth) को मुड़ा हुआ (फोल्ड) रखना जरूरी है, ताकि लोअर बर्थ पर बैठे यात्री आराम से बैठ सकें।
मिडिल बर्थ(Middle berth) कब खोली जा सकती है
Railway Board के कमर्शियल सर्कुलर नंबर 60 (2017) के अनुसार सोने का निर्धारित समय रात 10.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक है। इसी दौरान मिडिल बर्थ(Middle berth) को खोलकर सोने की अनुमति होती है। रेलवे के अनुसार सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को फिर से मोड़ देना चाहिये, ताकि लोअर बर्थ पर बैठने वाले यात्रियों को परेशानी न हो। इस समय सभी यात्रियों को सीट का उपयोग बैठने के लिये करना चाहिये।
अगर सीट को लेकर यात्रियों के बीच विवाद हो जाता है, तो उस स्थिति में Travelling Ticket Examiner (TTE) को नियम लागू कराने का अधिकार होता है। TTE का फैसला अंतिम माना जायेगा। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे बीमार व्यक्ति, दिव्यांगजन या गर्भवती महिलाओं के साथ सहयोग करें। अगर ऐसी स्थिति हो, तो उन्हें निर्धारित समय से ज्यादा देर तक सोने की अनुमति दी जा सकती है। रेलवे के नियमों के मुताबिक दिन के समय अपर बर्थ पर टिकट लेने वाले यात्रियों के लिये भी बैठने की व्यवस्था उपलब्ध रहती है।
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