Kohramlive : दुनिया में पानी(Water) की किल्लत अब सिर्फ खबर नहीं, हकीकत बनती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि हर चार में से एक इंसान को साफ पीने का पानी(Water) नसीब नहीं हो पा रहा। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी रिपोर्टें चेतावनी दे रही हैं कि अगर पानी का यही हाल रहा तो दुनिया “जल दिवालियापन” की तरफ बढ़ सकती है। लेकिन इसी संकट के बीच भारत ने समंदर की लहरों में उम्मीद की एक किरण ढूंढ ली है। हिंद महासागर के नीले विस्तार के बीच बसे लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप पर एक ऐसा प्लांट तैयार हो रहा है, जो समुद्र के खारे पानी(Water) को मीठा भी बनायेगा और साथ-साथ बिजली भी पैदा करेगा। वैज्ञानिकों की मानें तो यह दुनिया का पहला ऐसा हाइब्रिड प्लांट होगा जो 24 घंटे लगातार दो काम करेगा, पानी(Water) भी देगा और रोशनी भी। इस समय दुनिया में समुद्री पानी(Water) से मीठा पानी(Water) बन रहा। दुनिया में 20 हजार से ज्यादा डिसेलिनेशन प्लांट काम कर रहे हैं। सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा समुद्र से ही हासिल करते हैं। ये देश दुनिया के कुल डिसेलिनेटेड पानी(Water) का करीब 45% उत्पादन करते हैं। इसमें भारत भी पीछे नहीं है। भारत में समुद्री पानी(Water) को पीने योग्य बनाने की प्रक्रिया 2005 के बाद तेज हुई। चेन्नई, गुजरात, ओडिशा और महाराष्ट्र में भी ऐसे प्लांट लगे हैं। अनुमान है कि भारत में ये प्लांट रोजाना करीब 81 करोड़ लीटर पेयजल तैयार कर सकते हैं।
समंदर का तापमान बनेगा ताकत
यह प्लांट OTEC (ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन) तकनीक पर आधारित है। इसमें समुद्र की सतह पर मौजूद गर्म पानी(Water) और करीब एक हजार मीटर नीचे के ठंडे पानी के तापमान के अंतर का इस्तेमाल किया जायेगा। इसी तापमान के फर्क से टर्बाइन घूमेगी, बिजली बनेगी और उसी प्रक्रिया में समुद्री पानी मीठे पानी में बदल जायेगा। प्लांट के लिए समुद्र में करीब 3.8 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। 900 मिमी व्यास वाली यह पाइप गहराई से ठंडा पानी ऊपर लायेगी। यह पाइप हाई-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन (HDPE) की बनी है, जो समुद्र के दबाव को सहने में सक्षम है।
जापान-अमेरिका से अलग भारत की सोच
जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी OTEC तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वहां इसका उपयोग सिर्फ बिजली बनाने के लिये होता है। भारत पहली बार इस तकनीक से एक साथ बिजली और पीने का पानी दोनों तैयार करेगा। यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे विज्ञान और प्रकृति का शानदार संगम बता रहे हैं। लक्षद्वीप में पहले से ही लो टेम्परेचर थर्मल डिसेलिनेशन (LTTD) के प्लांट चल रहे हैं। ये प्लांट आठ द्वीपों पर लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करा रहे हैं। नये OTEC प्लांट के शुरू होने से यहां पानी(Water) की समस्या और भी कम हो जायेगी। अभी द्वीपों में बिजली के लिए काफी हद तक डीजल जनरेटर पर निर्भरता है। नया प्लांट शुरू होने के बाद साफ ऊर्जा से बिजली पैदा होगी। इससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा और खर्च भी कम होगा।


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