Ranchi(Kuldeep/Amitabh) : रांची से सटे ओरमांझी प्रखंड के एक छोटे से गांव पिपराबंडा में गुजरे तीन साल पहले हर घर नल जल योजना की आस जगी थी, वहां आज भी प्यास बुझाने के लिये लोग गड्ढों से रिसते पानी या कोसों दूर कुईंया से पानी लाने को बेवश और लाचार हैं। नल का कनेक्शन तो मिला, लेकिन जलमीनार न बनने के चलते टोंटी से पानी नहीं, सिर्फ धूल उड़ती है। कुछ गांव वालों का कहना है कि जब ठेकेदारों ने बोरिंग कराई और नलों की पाइपलाइन बिछी, तो गांववालों को लगा कि अब वो भी उन लोगों में शामिल होंगे, जिनके घर में बस नल खोलते ही पानी बहने लगता है। घर की बहुओं और बेटियों की आंखों में सुकून की चमक थी कि अब उन्हें कोसों दूर कुईंया तक नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन साल-दर-साल बीत गये, जलमीनार नहीं बना और सपनों का पानी सूख गया। गांव की कमली देवी कहती हैं, “जब पाइप लगा था, लगा कि हमारी तकलीफ खत्म हो गई। लेकिन अब रोज कुएं का चक्कर लगाना पड़ता है। बच्चे भूखे रह सकते हैं, लेकिन बिना पानी के चूल्हा कैसे जलेगा?” वहीं, फुलबसिया मुंडा की आंखों में नाराजगी साफ दिखती है, “हम गरीब लोग हैं, बड़े अफसरों के दफ्तर के चक्कर नहीं लगा सकते। पानी न हो तो जीना भी मुश्किल हो जाता है।” वैसे गांववालों की उम्मीद अब भी जिंदा है। सुनें क्या बोले गांव वाले…










