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भगवान बुद्ध की चार पत्नियों की कहानी में है ‘जन्‍म से मृत्‍यु तक की सच्‍चाई का संदेश’ इस तरह समझें और जानें

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Kohramlive Desk : वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती होती है। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। अहिंसा, करुणा और मानवता के लिए बुद्ध ने अनमोल संदेश दिए हैं। इनका सार समझ लें तो जीवन संवर जाए। बुद्ध के संदेश में हर पुरुष की 4 पत्नियां की कहानी काफी प्रचलित और चर्चित हैं। बुद्ध के प्रारंभिक उपदेश वाले 32 आगम सूत्रों में से एक में इस कहानी का जिक्र मिलता।

बुद्ध ने सुनाई 4 पत्नियों की कहानी

 कहा जाता है कि प्राचीन भारत की सामाजिक व्यवस्था में एक पुरुष कई पत्नियां रख सकता था। ऐसा ही एक पुरुष समय बीतने पर बीमार पड़ गया और उसे अपनी मौत करीब दिखने लगी। जीवन के अंत में, वो बहुत अकेलापन महसूस करने लगा। उसने अपनी पहली पत्नी को बुलाया और उसे अपने साथ दूसरी दुनिया में चलने के लिए कहा। व्यक्ति ने कहा, ‘मेरी प्यारी पत्नी, मैंने तुम्हें दिन-रात प्यार किया, जीवन भर तुम्हारा ख्याल रखा। अब मैं मरने वाला हूं, क्या तुम मेरे साथ वहां चलोगी जहां मैं अपनी मृत्यु के बाद जाऊं?’ उसे उम्मीद थी कि उसकी पहली पत्नी का जवाब हां ही होगा लेकिन उसने जवाब दिया, ‘मेरे प्यारे पति, मुझे पता है कि आप हमेशा मुझसे प्यार करते थे और अब आपका अंत करीब है। ऐसे में अब आपसे अलग होने का समय आ गया है। अलविदा मेरे प्रिय।’

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दूसरी पत्नी का जवाब : इसके बाद बीमार पुरुष ने अपनी दूसरी पत्नी को बिस्तर के पास बुलाया और मौत के बाद के सफर पर साथ चलने की विनती की। उसने कहा, ‘मेरी प्यारी दूसरी पत्नी, तुम जानती हो कि मैंने तुम्हे कितना प्यार किया है। कभी-कभी मुझे डर लगता था कि तुम मुझे छोड़ दोगी, लेकिन मैंने तुम्हें दृढ़ता से थामे रखा। मेरी प्रिय, मेरे साथ दूसरे सफर पर चलो।’ दूसरी पत्नी ने जवाब दिया, ‘प्रिय पति, आपकी पहली पत्नी ने आपकी मृत्यु के बाद आपका साथ देने से इनकार कर दिया तो फिर मैं भला आपके साथ कैसे जा सकती हूं। आपने मुझे केवल अपने स्वार्थ के लिए प्यार किया है।’

तीसरी पत्नी का जवाब :  मृत्युशय्या पर लेटे हुए पुरुष ने अपनी तीसरी पत्नी को बुलाया और उसे भी अपने साथ चलने को कहा। तीसरी पत्नी ने आंखों में आंसू भरकर उत्तर दिया, ‘मेरे प्रिय, मुझे आप पर दया आ रही है और अपने लिए दुख हो रहा है। इसलिए मैं अंतिम संस्कार तक आपके साथ रहूंगी।’ इस तरह तीसरी पत्नी ने भी उसके साथ चलने से इनकार कर दिया।

चौथी पत्नी का जवाब :  जब तीनों पत्नियों ने उसकी मृत्यु के बाद उसका अनुसरण करने से इनकार कर दिया तब उसे याद आया कि उसकी एक और पत्नी है। उसकी चौथी पत्नी, जिसकी उसने ज्यादा परवाह नहीं की थी। चौथी पत्नी के साथ उसने हमेशा एक दासी की तरह व्यवहार किया था और हमेशा उसे दुत्कारा था। पुरुष ने सोचा कि अगर वह अब उससे अंतिम सफर पर साथ चलने को कहता है तो वो निश्चित रूप से मना कर देगी। हालांकि, वो इतना ज्यादा डरा हुआ था और अकेलापन महसूस कर रहा था कि उसने अपनी चौथी पत्नी से भी दूसरी दुनिया में साथ चलने की गुजारिश की। चौथी पत्नी ने अपने पति के अनुरोध को तुरंत स्वीकार कर लिया।  कहा, ‘मेरे प्यारे पति, मैं तुम्हारे साथ जाऊंगी। कुछ भी हो, मैं हमेशा आपके साथ रहने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं। मैं आपसे कभी अलग नहीं हो सकती। यह कहानी है ‘एक आदमी और उसकी चार पत्नियों की। ‘

इन चार पत्नियों का क्या है मतलब : गौतम बुद्ध ने अपनी कहानी समाप्त करते हुए कहा, ‘प्रत्येक पुरुष और महिला की चार पत्नियां या पति होते हैं और हर एक का खास मतलब होता है। पहली पत्नी या साथी हमारा शरीर होता है, जिसे हम दिन-रात प्यार करते हैं। सुबह के समय हम अपना चेहरा धोते हैं, कपड़े और जूते पहनते हैं। हम अपने शरीर को भोजन देते हैं। हम पहली पत्नी की तरह अपने शरीर का ख्याल रखते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से जीवन के अंत में, शरीर यानी पहली ‘पत्नी’ हमें अगली दुनिया में नहीं ले जा सकती है।

शव का अंतिम संस्कार किया जाता है : बुद्ध ने कहा ‘जब अंतिम सांस हमारे शरीर को छोड़ती है, तो चेहरे का रंग बदल जाता है और हम अपने उज्ज्वल जीवन को खोने लगते हैं। हमारे प्रियजन इकट्ठा होकर विलाप कर सकते हैं, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होता है। ऐसे समय में शरीर को अंतिम संस्कार के लिए एक खुले मैदान में रख दिया जाता है और सिर्फ सफेद राख बच जाती है। यह हमारे शरीर का गंतव्य है।

भौतिक चीजों का तात्पर्य : दूसरी ‘पत्नी’ हमारे भाग्य, भौतिक चीजों, धन, संपत्ति, प्रसिद्धि, पद और नौकरी को दर्शाती है। हम इन सभी भौतिक चीजों से काफी जुड़ाव महसूस करते हैं जिसे पाने के लिए हमने कड़ी मेहनत की है। हम इन चीजों को खोने से डरते हैं और बहुत कुछ पाने की इच्छा रखते हैं लेकिन इनकी कोई सीमा नहीं है। जीवन के अंत में ये चीजें मृत्यु तक हमारा पीछा नहीं कर सकतीं। हमारे भाग्य ने जो भी इकठ्ठा किया है, उसे हमें छोड़ना ही होगा। हम इस दुनिया में खाली हाथ आए हैं और मृत्यु के समय भी हमारे हाथ खाली होते हैं। हम अपनी मृत्यु के बाद अपना भाग्य पकड़ कर नहीं रख सकते। जैसे दूसरी पत्नी ने अपने पति से कहा था, ‘तुमने अपने अहंकार और स्वार्थ के लिए सिर्फ मुझे अपने साथ रखा और अब अलविदा कहने का समय आ गया है।’

हमारे रिश्ते-नाते : बुद्ध कहते हैं कि तीसरी पत्नी का अर्थ यहां हमारे नाते-रिश्तेदारों से है। यह हमारे माता-पिता, बहन और भाई, सभी रिश्तेदारों, दोस्तों और समाज की तरह है। वो आंखों में आंसू लिए हमारे साथ श्मशान घाट तक ही आ सकते हैं। वो हमारे लिए दुखी और उदास रहते हैं। इसलिए हम अपने शरीर, भाग्य और समाज पर निर्भर नहीं रह सकते। हम अकेले आते हैं और अकेले ही इस दुनिया से जाते हैं। मृत्यु के बाद कोई हमारा साथ नहीं दे सकता।

चौथी पत्नी का क्या है मतलब : बुद्ध ने कहा, चौथी ‘पत्नी’ हमारा मन या चेतना है। जब हम गहराई से यह पहचान जाते हैं कि हमारा मन क्रोध, लालच और असंतोष से भरा हुआ है तो हम अपने जीवन को अच्छे नजरिए से देख पाते हैं। क्रोध, लोभ और असंतोष कर्म के नियम हैं। हम अपने कर्म से कभी पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं। जैसा कि चौथी पत्नी ने अपने मरते हुए पति से कहा था, ‘तुम जहां भी जाओगे, मैं तुम्हारे पीछे चलूंगी।

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