Ranchi : राजधानी रांची में बेखौफ अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं, इसका ताजा उदाहरण पंडरा इलाके से सामने आया। सरेआम जूता कारोबारी भूपल साहू की गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वारदात भीड़-भाड़ वाले इलाके में हुई, जहां आसपास लोग मौजूद थे, फिर भी अपराधी आराम से अपना काम करके फरार हो गया। इस हत्या की फैली खबर के बाद इलाके में तहलका मच गया। छोटे-बड़े कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि जंगल में जानवर है, पर महफूज है, बीच शहर में लोग सुरक्षित नहीं। भाजपा के दिग्गज नेता बाबूलाल मरांडी भी रांची में लॉ एण्ड ऑर्डर को लेकर खूब बोले। उन्होंने कहा कि यह कैसी पुलिसिंग हो रही, पता नहीं। काबिल अफसरों को किराने कर दिया गया। कृपापात्रों को दो-दो, तीन-तीन जिम्मेदारी दे दी गई। DIG बन गये अफसर रांची में SSP पद पर जमे पड़े हैं। उन्होंने सिस्टम पर सवाल उठाते हुये कई तीखे प्रहार किये।
बुधवार की शाम हुई दुस्साहसिक वारदात ने रांची ही नहीं, पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। महज 24 घंटे पहले कांके चौक में भाजपा नेता अनिल टाइगर की सरेआम हत्या कर दी गई थी और अब कारोबारी की गला रेतकर हत्या कर दी गई। रांची के अपराधियों में पुलिस का कोई डर-भय नहीं रह गया। सूत्रों के मुताबिक, विशाल फुटवेयर के संचालक भूपल साहू अपनी दुकान की सीढ़ियों पर खड़े थे, तभी एक युवक आया और उन पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिया। वारदात के वक्त वहां काफी भीड़ थी, क्योंकि पास में भंडारा चल रहा था, लेकिन हत्यारा बेखौफ होकर हमला करता रहा और फिर फरार हो गया। भूपल साहू लहूलुहान होकर गिर पड़े, लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद साहू को नहीं बचाया जा सका।
व्यापारियों में आक्रोश, सड़क पर उतरने की तैयारी
इस घटना के बाद रांची के व्यापारियों में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि अगर पुलिस ऐसे ही नाकाम रहती है, तो हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। रांची चेंबर ऑफ कॉमर्स ने प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है कि अगर 48 घंटे में आरोपी नहीं पकड़ा गया, तो आंदोलन करेंगे, वहीं रांची में कानून व्यवस्था बहाल करो, वरना व्यापार बंद होगा। इस बीच एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस हत्यारे की तलाश में जुटी है और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। लेकिन सवाल उठता है कि हर बार यही बयान आता है, फिर भी अपराध कम क्यों नहीं होते?












