Ranchi : रांची की दोपहर में जब ठंडी हवा CID मुख्यालय के प्रांगण को छू रही थी, उसी समय वहां एक अलग ऊर्जा महसूस की गई, एक ऐसी ऊर्जा जो व्यवस्था में बदलाव का संकेत दे रही थी। CID के प्रभारी IG मनोज कौशिक ने विभाग की कई महत्वपूर्ण इकाइयों का निरीक्षण कर यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य में साइबर अपराधों पर अब नकेल और भी कसने वाली है। निरीक्षण के दौरान IG मनोज कौशिक ने कर्मचारियों की बात बड़े ध्यान से सुनी। उनकी समस्याओं को समझते हुये उन्होंने कहा कि हर कर्मचारी हमारी ताकत है। यदि व्यवस्था को मजबूत बनाना है, तो पहले उस व्यवस्था में काम करने वाले लोगों की सुविधा और आत्मविश्वास को भी सशक्त करना होगा। उन्होंने त्वरित निवारण और सुचारू संचालन का आश्वासन दिया और यह भी कहा कि “पुलिसिंग केवल अनुशासन नहीं, एक सेवा भावना भी है।”
IG कौशिक ने इस दौरान राज्य साइबर क्राइम थाना, 1930 साइबर हेल्पलाइन, डायल-112, संयुक्त साइबर अपराध समन्वय टीम और फिंगर प्रिंट ब्यूरो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के हर पड़ाव पर उन्होंने बारीकी से कार्यप्रणाली की समीक्षा की, कहीं सिस्टम की नब्ज टटोली, कहीं मानव संसाधन की धड़कन सुनी। CID के DIG चंदन झा, SP एहतेशाम वकारिब और DSP नेहा बाला इस अवसर पर उनके साथ मौजूद रहे। सभी ने एक साथ मिलकर उस विश्वास की तस्वीर खींची, जिसकी नींव है, “सुरक्षित झारखंड, सशक्त नागरिक।”
जनता की सांस बन चुकी ये दो डायल नंबर
IG कौशिक ने 1930 साइबर हेल्पलाइन और डायल-112 की सराहना करते हुये कहा कि इन दोनों इकाइयों ने नागरिकों के जीवन में भरोसे की एक नई लकीर खींची है। रात हो या दिन, संकट का क्षण हो या अचानक मदद की जरूरत, ये दोनों सेवायें राज्य के लोगों के लिये “सुरक्षा का पहला हाथ” बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह देखकर गर्व होता है कि हमारी टीमें तकनीक के इस युग में न केवल तेज हैं, बल्कि संवेदनशील भी। हमारा उद्देश्य सिर्फ अपराध रोकना नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित महसूस कराना है।




