Kohramlive : बच्चों की परवरिश में प्यार जितना जरूरी है, धैर्य भी उतना ही जरूरी है। कभी बच्चा छोटी-सी बात पर अड़ जाता है, कभी बात नहीं मानता और कभी एक ही सवाल दस बार पूछकर माता-पिता का धैर्य आजमा लेता है। ऐसे में अक्सर हम समझाने के लिये लंबा भाषण शुरू कर देते हैं। लेकिन हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं। कई बार कम बोलकर और स्मार्ट तरीके से प्रतिक्रिया देना ज्यादा असरदार होता है। अगर आपके घर में भी रोजाना ऐसी छोटी-छोटी जंग छिड़ती रहती है, तो ये 5 आसान तरीके काम आ सकते हैं।
हर बात का तुरंत जवाब देने से बचेंः
बच्चे ने कुछ ऐसा कर दिया जिससे आपको गुस्सा आया? तुरंत डांटने के बजाय कुछ सेकंड रुकिये। कई बार बच्चे का व्यवहार खुद ही बदल जाता है। हर छोटी बात पर लगातार डांट या लंबी समझाइश देने से बच्चा आपकी बात सुनने के बजाय उसे नजरअंदाज करना शुरू कर सकता है। कभी-कभी आपका शांत रहना ही सबसे बड़ा जवाब होता है।
जो सिखाना है, पहले खुद करके दिखायेंः
बच्चे सिर्फ माता-पिता की बातें नहीं सुनते, वे उनके व्यवहार की नकल भी करते हैं। अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अपनी चीजें व्यवस्थित रखे, तो रोज उसके सामने अपनी चीजें सही जगह पर रखें। उसे बार-बार यह कहने के बजाय कि “सामान जगह पर रखो”, खुद करके दिखाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। बच्चों की किताब में सबसे बड़ा अध्याय माता-पिता का व्यवहार होता है।
बच्चा गुस्से में हो तो थोड़ा चुप रहियेः
बच्चा गुस्से में है, बहस कर रहा है और आपकी एक बात का चार जवाब दे रहा है? ऐसे समय पर समझाने की कोशिश मामला और गर्म कर सकती है। उसे थोड़ा समय दें। खुद भी शांत रहें। जब उसका गुस्सा कम हो जाये, तब आराम से बात करें। शांत दिमाग में कही गई बात के समझ आने की संभावना ज्यादा रहती है।
हुक्म नहीं, दो विकल्प दीजियेः
बच्चों को हर काम के लिये आदेश देना उन्हें पसंद नहीं आता। ऐसे में उन्हें दो छोटे विकल्प देकर देखिये। मसलन, “पहले होमवर्क करोगे या पहले खाना खाओगे?” अब बच्चा जो चुने, उसी के हिसाब से आगे बढ़ें। इससे उसे लगता है कि फैसले में उसकी भी भूमिका है और ‘नहीं करूंगा’ वाली बहस काफी हद तक कम हो सकती है।
हर छोटी गलती पकड़ना जरूरी नहींः
बच्चे हर वक्त बिल्कुल सही व्यवहार करें, ऐसा संभव नहीं है। अगर कोई आदत छोटी है, बच्चे की सुरक्षा से जुड़ी नहीं है और उससे कोई बड़ी परेशानी नहीं हो रही, तो कभी-कभी उसे नजरअंदाज करना भी ठीक है। हर बात पर टोकने से बच्चा लगातार निगरानी महसूस कर सकता है। इसलिये तय करें कि कहां समझाना जरूरी है और कहां छोड़ देना बेहतर। पेरेंटिंग का आसान मंत्र—हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं, सही बात पर सही प्रतिक्रिया। बच्चों की परवरिश में कोई एक फॉर्मूला हर बच्चे पर काम नहीं करता। उम्र, स्वभाव और परिस्थिति के हिसाब से तरीका बदलना पड़ता है। लेकिन एक बात हमेशा याद रखी जा सकती है, बच्चे को हर बार हराने की नहीं, धीरे-धीरे समझाने और सही दिशा दिखाने की जरूरत होती है। कभी विकल्प दीजिये, कभी खुद करके दिखाइये, कभी शांत रहिये और कभी छोटी बात को जाने दीजिये। पेरेंटिंग में कम शोर और ज्यादा समझदारी कई मुश्किल पलों को आसान बना सकती है।








