Kohramlive : गांव की रसोई हो या शहर की थाली, एक बात दादी-नानी हमेशा कहती थीं, “पेट ठीक तो सब ठीक!” अब विज्ञान भी उसी पुरानी सीख पर मुहर लगा रहा है। नई मेडिकल रिपोर्ट्स ने इशारा दिया है कि गड़बड़ पाचन सिर्फ गैस-अपच तक सीमित नहीं रहता, यह धीरे-धीरे दिल की धड़कनों पर भी असर डाल सकता है। हमारे पेट यानी गट में करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं, जो पाचन, इम्युनिटी और मेटाबॉलिज्म को संभालते हैं। लेकिन जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ने लगती है। यही सूजन धीरे-धीरे धमनियों में प्लाक जमा कर दिल की राह को संकरा कर सकती है। झारखंड के जाने माने डॉक्टर उमा शंकर वर्मा बताते हैं कि पाचन तंत्र और दिल का रिश्ता बहुत गहरा है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि गट बैक्टीरिया से बनने वाला एक तत्व TMAO हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ा सकता है। हैरानी की बात ये कि बीपी और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल होने के बाद भी यह खतरा बना रह सकता है।
पेट खराब तो मूड भी उदास
गट हेल्थ बिगड़ने पर केवल शरीर नहीं, मन भी प्रभावित होता है। चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद की गड़बड़ी और डिप्रेशन तक का जोखिम बढ़ सकता है। यानी पेट की आग, दिल और दिमाग, तीनों को झुलसा सकती है। दिल और पाचन दोनों को दुरुस्त रखने के आसान देसी मंत्र के बारे डॉ वर्मा बताते हैं कि रोजाना फाइबर से भरपूर खाना (दाल, सब्जी, फल), ओमेगा-3 युक्त आहार (अखरोट, अलसी, मछली), भरपूर पानी एवं रोज थोड़ा चलना-फिरना, शरीर को सक्रिय रखना है। ये छोटे-छोटे कदम पेट को संतुलित रखेंगे और वही संतुलन दिल की सुरक्षा कवच बन जायेगा। डॉ वर्मा कहते हैं शरीर का असली पहरेदार बाहर नहीं, भीतर बैठा है, आपका गट। उसे स्वस्थ रखिये, क्योंकि जब पेट शांत रहता है, तभी दिल भी सुकून से धड़कता है।






