spot_img
spot_img
spot_img

Palamu किला मेले में राजा मेदिनीराय के आदर्श तार-तार

Date:

spot_img
spot_img
📖भाषा चुनें और खबर सुनें:
🎙️कोहराम LIVE रेडियो
  • जमकर खेला गया जुआ, नशे में झूमते नजर आए लोग
  • मेले का उद्देश्य भूल रहे लोग, परंपरा हो रही धूमिल

पलामू, संजीत कुमार : Palamu के लिए राजा मेदिनीराय का खास स्थान है। उन्हीं के नाम पर डालटनगंज शहर का नाम भी मेदिनीनगर रखा गया है। वे पलामू प्रमंडल ही नहीं झारखंड के सर्वोत्तम राजाओं में एक थे। लेकिन आज उनके आदर्शों को Palamu किला मेला में चूर-चूर कर दिया गया। पलामू किले में हर वर्ष लगने वाले मेले में इसकी बानगी देखने को मिली। यहां राजा मेदिनीराय की सोच और उनके सकारात्मक पहलुओं को किसी ने नहीं समझा। मेले में एक-दो नहीं, बल्कि मांस-मदिरा की सैकड़ों दुकानें लगीं। उन दुकानों पर हजारों की संख्या में शराब और मांस का सेवन करनेवाले झूमते हुए देखे गये।

Palamu किला मेले में जुआ भी जमकर खेला गया

औरंगा नदी तट पर सतबरवा प्रखंड के फुलवरिया स्थित मेला परिसर में ग्राहकों को बुलाने के लिए खुलेआम शराब दुकान के संचालक चिल्लाते हुए कह रहे थे कि आइये और महुआ दारू 50 रुपये का बोतल पीजिए, हड़िया 30 रुपये में एक बोतल, ताड़ी एक बोतल 50 रुपये में और अंग्रेजी पव्वा 180 में ले जाइये और जमकर लुत्फ उठाइये। मेले में जुए का खेल भी जमकर खेला गया। वहीं,  रस्सी वाला गेम भी चला, जिसका संचालक चिल्लाते हुए कहता, इधर आओ और 1000 लगाओ, 2000 पाओ।

इसे भी पढ़ें : आज से बिना मास्क नजर आए तो होगी कोरोना जांच

मेले में टेबल-कुर्सी के साथ पेटी पर शराब रखकर धड़ल्ले से बेची जा रही थी। परिसर में सैकड़ों जगह मांस-मछली बना कर बेचे जा रहे थे। करीब एक हजार से ज्यादा चूल्हा और बर्तन के साथ महिला-पुरुष ग्राहकों को चखना के तौर पर परोस रहे थे।

छठ के अगले दो दिन तक लगता है मेला

महापर्व के अगले दिन से दो दिनों तक पलामू के प्रसिद्ध पलामू किला परिसर में मेले का आयोजन किया जाता है। दो दिवसीय मेले का समापन केवल खाने-पीने और मनोरंजन तक सीमित रह गया। हालांकि मेले में परंपरागत हथियार, लकठो, बादाम, पकौड़ी, चावल-दाल सब्जी, सिंघाड़ा आदि भी खूब बिके। मगर पहले की तरह मेले में वो परंपरागत तौर-तरीके की कमी नजर आई।

राजा मेदिनीराय के आदर्शों पर चलने की जरूरत

पलामू किला मेला के संयोजक अवधेश सिंह चेरो ने कहा कि राजा मेदिनीराय के आदर्शों पर चलने की जरूरत है। उनकी सोच थी कि पलामू प्रमंडल के साथ उनके अधीनस्थ क्षेत्रों में दूध-दही की भरमार हो। तमाम दुर्गुण को त्याग लोग एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल रहें। उनका शासनकाल सर्वोत्तम शासन का एक नमूना था। 400 वर्षों तक 16 चेरो राजाओं ने पलामू किले पर राज किया था।

क्षेत्र के प्रसिद्ध पंडित अक्षयवट नाथ पांडे कहते हैं कि राजा मेदिनीराय के आदर्शों को अपनाने वाले लोगों ने मेले में आकर उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। मेले के आयोजन के पीछे राजा मेदिनीराय के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है, लेकिन समय के साथ इसके आयोजन का उद्देश्य खत्म होता जा रहा है।

इसे भी पढ़ें : Moderna ने बताया कितनी होगी कोरोना वैक्सीन की कीमत

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Related articles:

जमीन के लिये चाचा पर चली गो’ली! भतीजे पर लगा संगीन आरोप…

Palamu : जिले के मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र में...

शादी में जाना था, मौ’त ने रास्ते में रोक लिया… एक साथ बुझ गये 3 चिराग

Lohardaga : एक शादी समारोह में शामिल होने निकले...

21 जून को छुट्टी नहीं! योग दिवस पर खुलेंगे झारखंड के सभी सरकारी स्कूल…

Ranchi : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अवसर पर झारखंड...

अब कामकाजी महिलाओं पर बुरी नजर का मतलब आफत…

Kohramlive : देशभर में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान...