राष्ट्रपति से दया याचिका खारिज होते ही जल्लाद पवन आया हरकत में
मुरादाबाद : मैं एक बुरी मां हूं। मुझे भूल जाना बेटा। कभी याद मत करना। याद सताये तो अपनी छोटी मम्मी और पापा से लिपट जाना। पढ़ लिख कर एक अच्छा इंसान बनना। यह कहते हुए शबनम अपने मासूम बेटे को चूमती रह गयी। शबनम ने 13 दिसंबर 2008 को मुरादाबाद जेल में अपने बेटे को जन्म दिया था। फांसी की सजा पाने वाली शबनम के मासूम बेटे को बुलंदशहर के एक दंपती ने गोद ले लिया है। कुछ दिन पहले यह दंपती रामपुर जेल में बंद शबनम से मेल मिलाप कराने उसके बेटे को ले गये थे। राष्ट्रपति से पास से दया याचिका खारिज होने के बाद शबनम की धड़कनें तेज हो गयी हैं। उसे अब चिंता सताने लगी है कि बचने की कोई उम्मीद नहीं है। आखिर बचे तो क्यों। अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने माता पिता सहित परिवार के सात लोगों का कुल्हाड़ी से खून कर महापाप किया। यह दिल दहला देने वाली वारदात यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में हुई थी। जिला सत्र न्यायाधीश, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट हर किसी ने शबनम और उसके प्रेमी सलीम को गुनहगार मान फांसी पर लटका देने की सजा सुनायी है।
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हत्या करने से पहले शबनम ने अपने घरवालों को बेहोशी की दवा खिलाई और फिर सबको मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पूरी घटना का कारण था शबनम का अंधा प्यार। शबनम एक पढ़ी लिखी और बावनखेड़ी के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी है। परिवार के लोग उससे बेहद प्यार करते थे। मगर शबनम एक मजदूर और पांचवीं फेल अपने आशिक सलीम को पाने की खातिर परिवार के सात लोगों को काट डाला।
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बावनखेड़ी की इस चर्चित हत्याकांड की जांच थानेदार आरपी गुप्ता ने की। उन्होंने 52 दिन में केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद 300 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी। जिसमें 45 गवाह भी बनाए गए थे।
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