Gumla : रांची से दिल्ली तक पसरी इस कहानी में अपराध की परतें हैं, लालच की चाल है और दो मासूम जिंदगियों का दर्द भी। लेकिन खुदा का शुक्र है कि गुमला पुलिस ने वक्त रहते वह कर दिखाया जो फिल्मों में ही देखने को मिलता है। गुमला पुलिस ने दो नाबालिग लड़कियों के अपहरण के मामले में बिहार के समस्तीपुर (चकमैसी, मदनपुर) निवासी विकास सिंह को दिल्ली के करोलबाग के टोडापुर दशघरा इलाके से गिरफ्तार कर लिया। वहीं, दोनों नाबालिग लड़कियों को सही-सलामत खोज निकाला। इसकी पुष्टि गुमला के SP हारिश बिन जमां ने मीडिया से की है। बीते 13 अक्टूबर की रात परिजनों की आंखों से नींद गायब थी। दो नाबालिग छात्रायें अचानक गायब हो गई। परिजनों ने गुमला थाना में आवेदन दिया और अपहरण की आशंका जताई। गुमला SP के आदेश पर SDPO के नेतृत्व में SIT गठित की गई। गठित SIT को इनपुट मिला कि दोनों लड़कियां दिल्ली में हैं। टीम ने बिना वक्त गंवाये दिल्ली के करोलबाग टोडापुर दशघरा इलाके में छापेमारी की और स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों लड़कियों को छुड़ाया। वहां से विकास सिंह पकड़ा गया। पूछताछ में उसने चौंकाने वाली बातें बताईं। विकास ने कहा कि वह पैनकरस ट्रैवल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में साल 2013 से काम कर रहा है। वह अपने दोस्त अशोक यादव के कहने पर छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के दुलुदुला करोना गांव गया था। वहीं से कहानी ने मोड़ लिया। बीते 9 अक्टूबर को विकास सिंह, अशोक यादव और अविनाश नायक उर्फ अंकित रांची के लिये रवाना हुये।
रांची बस स्टैंड से शुरू हुआ “झूठा प्यार”
रांची बस स्टैंड पर जब ये तीनों ऑटो में सवार हुये, तभी दो लड़कियां पहले से उस ऑटो में बैठी थीं। दिल्ली जाने की बात पर दोनों ने हामी भर दी। इसके बाद दोनों लड़कियों को अशोक यादव के घर में रखा गया, जहां उसकी पत्नी भी मौजूद थी। अशोक ने दोनों को 20–30 हजार रुपये के प्रलोभन के साथ “काम” बताया। पर जब काम पसंद नहीं आया, तो विकास सिंह उन्हें अपने साथ ले गया। कमरा किराये पर लेने में परेशानी हुई, तो विकास ने एक नाबालिग लड़की की मांग में सिंदूर भर दिया, ताकि लोग उन्हें पति-पत्नी समझें और फिर शुरू हुआ “छल का अध्याय” दिल्ली की भीड़ में खो जाने की कोशिश।






