Kohramlive : हिमालय की शांत वादियों में गूंजती आराधना की घंटियां, मानसरोवर की लहरों में प्रतिबिंबित भोलेनाथ की महिमा—वर्षों से रुकी इस आध्यात्मिक यात्रा को पुनः आरंभ करने की आस जगी है। बीजिंग में मंगलवार को हुई भारत-चीन वार्ता के दौरान कैलाश-मानसरोवर यात्रा की बहाली पर गंभीर चर्चा हुई। 2020 में सीमा विवाद के कारण बंद हुई यह यात्रा, श्रद्धालुओं के लिये एक धार्मिक, एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। अब जब दोनों देशों ने यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है, तो भक्तों के लिये यह किसी वरदान से कम नहीं। हालांकि, यात्रा के नये नियम और प्रक्रियाएं अभी तय होनी बाकी हैं। यात्रा के साथ-साथ, दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर नदियों के डेटा साझा करने पर भी चर्चा की। भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर भी स्पष्टता मांगी है।
LAC पर जमी बर्फ पिघल रही है
गलवान की चोटियों पर चार साल पहले जो ठंडक छा गई थी, वह अब धीरे-धीरे नरम होती दिख रही है। पैंगोंग झील, गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स से सैनिकों की वापसी के बाद, अब देमचोक और डेपसांग में भी गतिरोध खत्म करने की दिशा में काम चल रहा है।
भारत-चीन संबंधों की नई सुबह
PM नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई पिछली बैठक के बाद अब यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश संबंधों को सामान्य करने की ओर बढ़ रहे हैं। बीजिंग में हुई यह बैठक एक नई शुरुआत की ओर इशारा कर रही है—जहां कूटनीति और संवाद के सहारे विवादों की जगह विश्वास को दिया जायेगा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि कैलाश-मानसरोवर यात्रा की राह कब तक साफ होती है, और क्या यह वार्ता वाकई दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा भर सकेगी।












