New Delhi : नई दिल्ली की हवा में आज लोकतंत्र की आहट कुछ और गहरी थी। भारत मंडपम के विशाल प्रांगण में जब देशभर के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से आये मीडिया और संचार अधिकारी एक छत के नीचे जुटे, तो यह लोकतंत्र की साख को और मजबूत करने की सामूहिक प्रतिज्ञा बन गई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मिलकर उद्घाटन सत्र को रोशन किया। मंच से उठे उनके शब्द मानो यह संदेश थे कि “भारत का चुनाव, भारत का विश्वास है और इस विश्वास को कोई झूठ या भ्रम डिगा नहीं सकता।”
गलत सूचना बनाम सच की ताकत
कार्यशाला का केंद्र था, भ्रामक सूचनाओं का जाल और उसे काटने के हथियार। अधिकारियों को समझाया गया कि मतदाता केवल वोट डालने वाला नागरिक नहीं, बल्कि लोकतंत्र का प्रहरी है। ऐसे में जरूरी है कि उसे समय पर तथ्य आधारित सूचना मिले, ताकि अफवाहें और फर्जी प्रचार उसके निर्णय को प्रभावित न कर सकें। सत्रों में इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि CEO कार्यालयों का संचार तंत्र कैसे और मजबूत हो, ताकि मीडिया और जनता तक तथ्य तुरंत और साफ तौर पर पहुंच सकें। सोशल मीडिया के दौर में सेकंडों में फैलने वाली गलत खबर का जवाब सेकंडों में ही सच के साथ दिया जा सके।
मतदाता सूची और पारदर्शिता पर खास सत्र
मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण से लेकर तकनीकी उपकरणों और रणनीतियों तक पर विशेषज्ञों ने प्रकाश डाला। यह भरोसा दिलाया गया कि चुनाव की हर बुनियाद संविधान की मर्यादा और पारदर्शिता से ही संचालित होती है। यह कार्यशाला कोई पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले भी 9 अप्रैल और 5 जून को IIIDEM, नई दिल्ली में ऐसे ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित किये गये थे।












