Ranchi : झारखंड पुलिस मुख्यालय का सभागार शुक्रवार को किसी कोर्टरूम जैसा अनुशासन और रणनीति से भरा नजर आया। कानून, तकनीक और पुलिसिंग, तीनों का संगम हुआ, हाई लेवल मीटिंग में नई आपराधिक व्यवस्थाओं पर बड़ी समीक्षा बैठक हुई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत सरकार के आंतरिक सुरक्षा-11, गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव निष्ठा तिवारी और झारखंड की DGP तदाशा मिश्र ने की। बैठक में भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधानों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा हुई। खास जोर ई-साक्ष्य ऐप के सही और सकारात्मक इस्तेमाल पर दिया गया, ताकि जांच में सबूत मजबूत और वैज्ञानिक बन सकें। बैठक में पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कांडों का अनुसंधान तय समय सीमा में पूरा हो और हर जांच में फॉरेंसिक टीम की मदद ली जाये।
दिक्कतें भी सुनी गईं, समाधान का रोडमैप तैयार
जिलों द्वारा ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग में आने वाली तकनीकी व व्यवहारिक समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई। साइबर क्राइम, काउंटर टेररिज्म, ड्रग कंट्रोल, डिजास्टर मैनेजमेंट और पुलिस मॉडर्नाइजेशन जैसे अहम विषयों पर भी व्यापक समीक्षा की गई। विदेशी नागरिकों से जुड़ी वैधानिक प्रक्रियाओं और चुनौतियों पर भी अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किये। बैठक में जांच की वैज्ञानिक पद्धति को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। बैठक का संदेश साफ था कि अब सिर्फ बयान नहीं, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य ही केस की असली ताकत होंगे। इस हाई लेवल मीटिंग में कई आला पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव, एनआईसी के स्टेट कोऑर्डिनेटर समेत विभिन्न शाखाओं के IG, DIG और निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल हुये।














