RANCHI : शहर में अतिक्रमण मामले में जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट वैसे लोगों से पूरी सहानुभूति रखता है, जो निचले तबके के हैं। उनका घर तोड़ा जा रहा है, लेकिन उनके पुनर्वास के लिए सरकार के पास नहीं है। कोर्ट निर्मम नहीं है। अदालत रांची को बचाना चाहती है। दो दिन का नोटिस देकर गरीबों का घर नहीं तोड़ना चाहिए। गरीबों को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उनके साथ न्याय दूसरा और अमीरों के साथ दूसरा न्याय हो रहा। न्याय सबके लिए समान होना चाहिए।
बसाने के लिए सरकार की क्या है योजना
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता दर्शना पोद्दार से पूछा कि अतिक्रमण हटाओ अभियान से प्रभावित लोगों को बसाने के लिए सरकार की क्या योजना है। इस पर नगर विकास विभाग के सचिव ने अदालत को बताया कि ऐसे लोगों को बसाने के लिए सरकार के पास योजना है। इस पर काम किया जा रहा है। रांची शहर बिना प्लान के बढ़ रहा है। लोगों को सरवाइव करने के लिए प्रकृति की रक्षा करनी होगी। अतिक्रमण करने वालों से कोई समझौता नहीं होगा। कोर्ट क्रेडिट नहीं लेना चाहता। सरकार और विभाग क्रेडिट ले लेकिन काम करें।
सभी पहलुओं को देखकर लोगों को हटाएं
कोर्ट ने कहा कि गरीबों को नोटिस के बाद थोड़ा ज्यादा समय देना चाहिए, जिसे वो अपनी व्यवस्था कर सकें। जिन लोगों ने अतिक्रमण किया है, उन्हें हटना तो पड़ेगा, लेकिन कोरोना और मॉनसून के वक़्त ये कहां जाएंगे। इसलिए सभी पहलुओं को देखकर ही लोगों को हटाएं। 12 घंटा या 24 घंटे का वक़्त देकर घर तोड़ना अमानवीय प्रतीत होता है। घर हटाने के लिये जितनी तेजी से कार्रवाई की गई। उतनी ही तेज़ी से पुनर्वास का भी इंतजाम होना चाहिए।
जलाशयों में हुए अतिक्रमण की दी गई जानकारी
सरकार की ओर से गुरुवार को हाई कोर्ट को जलाशयों में हुए अतिक्रमण की जानकारी दी गई। बताया गया कि
राज्य में जितने भी जलाशय हैं उसकी पहचान की जाएगी। पहचान के बाद सीमांकन किया जाएगा। जलाशयों के अतिक्रमणकारियों की पहचान कर नोटिस दिया जाएगा। उनकी आपत्तियों को सुनने के बाद अतिक्रमण हटाया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा अतिक्रमण हुआ तो इससे संबंधित अंचलाधिकारी जिम्मेवार होंगे। चीफ जस्टिस डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने सरकार के इस निर्णय की सराहना की और कहा कि यदि सरकार इस पर गंभीरता से अमल करे, तो इस तरह के मामले अदालत में नहीं पहुंचेंगे। कोर्ट भी शहर के जलाशयों को संरक्षित करना चाहता है।
अतिक्रमण करने वालों की हुई पहचान
पेयजल विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने अदालत को बताया कि धुर्वा और गेतलसूद डैम के सीमांकन काम काम पूरा कर लिया गया है। अतिक्रमण करने वालों की पहचान कर ली गई है और उन्हें नोटिस दे दिया गया है।
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