Kohramlive : रात के तीसरे पहर जब अमावस्या का अंधकार और मातम का सन्नाटा गहराया हुआ था, तभी अचानक आसमान लाल हो उठा। धुंआधार मिसाइलें और आकाश को चीरती जेट की गरज… यह कोई आम रात नहीं थी। यह वह रात थी जब भारत ने उन जख्मों का हिसाब मांगा, जो 22 अप्रैल की शाम ने दिये थे। जैसे ही पहलगाम में खून से सनी वादियों का बदला लेने की तैयारी हुई, ऑपरेशन सिंदूर अपने पूरे तेज में था। “हमारी मांग सिर्फ बदला नहीं, इंसाफ है,” यही चीखती नजर आईं आरती रामचंद्रन, जिनके पिता एन. रामचंद्रन को आतंकियों ने उसी की आंखों के सामने छीन लिया था। “अब्बा नहीं लौटेंगे, मगर अब मैं चैन से रो सकती हूं,” उसने मीडिया कैमरों की परवाह किये बगैर कहा। उसके पीछे, जली हुई एक तस्वीर में उसका और उसके पिता का मुस्कुराता चेहरा झांक रहा था। हिमांशी नरवाल की आंखों में आंसू थे, मगर उनमें राहत की भी एक बूंद चमक रही थी। ”जिस सिंदूर को आतंकियों ने बेरहमी से मिटाया था, भारत ने उसी नाम से अपना जवाब दिया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’।” “मेरा बेटा नहीं रहा… लेकिन देश जिंदा है,” यह शब्द थे सुमति राव के। उस मां के, जिसने अपने बेटे को खोया, पर उम्मीद को नहीं। “मोदी पर भरोसा था, और उन्होंने भरोसा निभाया।”
इसे भी पढ़ें : Breaking : गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाई बैठक, ये होंगे शामिल
इसे भी पढ़ें : बड़ी कार्रवाई, 18 नक्सली ढेर…
इसे भी पढ़ें : भारत के एयर स्ट्राइक के बाद ट्रंप का पहला बयान… देखें वीडियो
इसे भी पढ़ें : Big Breaking : रक्षा मंत्री ने ‘X’ पर किया पोस्ट
इसे भी पढ़ें : भारत के एयर स्ट्राइक के बाद ट्रंप का पहला बयान… देखें वीडियो
इसे भी पढ़ें : रांची में मॉक ड्रिल, 3 बजे से इन रास्तों पर नो एंट्री
इसे भी पढ़ें : पूर्व आर्मी चीफ का बड़ा बयान, ‘पिक्चर अभी बाकी है’
इसे भी पढ़ें : पहलगाम का बदला, दहला पाकिस्तान, एक नजर में… देखें वीडियो







