Bihar : बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सियासत और कानूनी बहस गर्म है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिये करोड़ों नाम मतदाता सूची से गायब किये जा रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि यह पारदर्शिता और शुद्धता बनाये रखने के लिए ज़रूरी कदम है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, मामला “तथ्यों से ज्यादा भरोसे की कमी” का है। ECI ने बताया कि 7.9 करोड़ मतदाताओं में से 6.5 करोड़ को कोई दस्तावेज़ नहीं देना पड़ा, क्योंकि वे या उनके माता-पिता पहले से 2003 की सूची में थे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि अगर 7.9 करोड़ में से 7.24 करोड़ ने प्रक्रिया पूरी कर ली, तो “1 करोड़ नाम कटने” का दावा कैसे टिकता है? दस्तावेज विवाद में कोर्ट ने माना कि आधार या वोटर आईडी अकेले नागरिकता का सबूत नहीं, इसके साथ अन्य दस्तावेज भी जरूरी हैं। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव समेत कई नेताओं ने समय सीमा, ‘65 लाख नाम मृत/पलायन/डुप्लीकेट बताने’ और ड्राफ्ट सूची की गड़बड़ियों पर सवाल उठाये।
ECI की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि यह ड्राफ्ट रोल है, गड़बड़ियां अंतिम सूची में सुधारी जायेंगी।
1 अगस्त को ड्राफ्ट और 30 सितंबर को अंतिम सूची जारी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही चेतावनी दी कि अगर बड़े पैमाने पर नाम कटे, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा। कल यानी बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी, जिसमें अदालत ने ECI से पूरा डाटा तैयार रखने को कहा है।
इस सुनवाई में आरजेडी के मनोज झा, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, एनसीपी की सुप्रिया सुले, सीपीआई के डी. राजा, सपा के हरिंदर सिंह मलिक, शिवसेना (उद्धव गुट) के अरविंद सावंत, जेएमएम के सरफराज अहमद, सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य और पीयूसीएल-एडीआर व योगेंद्र यादव जैसे कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
इसे भी पढ़ें : जनसुनवाई बनी रणभूमि, प’थराव से मचा तहलका… देखें वीडियो










